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MP News: ईरान से ‘सूखे मेवे’ आना बंद, अचानक बढ़े रेट, कई सामान महंगे

Iran-America War Impact: इंदौर में माल ढुलाई महंगी होने से व्यापारियों की लागत बढ़ गई है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
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इंदौर

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Astha Awasthi

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Updated: 2 Apr 2026, 11:49 AM IST

iran-America War Impact

iran-America War Impact (Photo Source - Patrika)

Iran-America War Impact: इंदौर में युद्ध का प्रभाव कारोबार पर दिखाई दे रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन, तेल की कीमतों व व्यापारिक माहौल में आई अनिश्चितता ने शहर के व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इससे रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो जाएंगी। तेल की कीमतें बढ़ने से बाजारों का आर्थिक गणित गड़बड़ाने लगा। युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ा है। इंदौर में माल ढुलाई महंगी होने से व्यापारियों की लागत बढ़ गई है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

आयात-निर्यात क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। मध्य-पूर्व के देशों से आने-जाने वाले व्यापारिक मार्गों में बाधा आने से कई वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हुई है। कपड़ा, मशीनरी, केमिकल सेक्टर में देरी व लागत बढ़ने की समस्या आ रही है। व्यापारियों को ऑर्डर में देरी और कैंसिलेशन का सामना करना पड़ रहा है।

निर्यात हो रहा प्रभावित

इंदौर और पीथमपुर के कुल वार्षिक निर्यात को जोड़ लिया जाए तो आंकड़ा 2000 करोड़ रुपए तक पहुंचता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ पीथमपुर से ही बीते वित्त वर्ष में 17,850 करोड़ रुपए का निर्यात हो चुका है। युद्ध के बाद से निर्यात प्रभावित हो गया है।

5,000 से अधिक उद्योगों में उत्पादन प्रभावित

कच्चे माल की उपलब्धता पर भी असर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर एल्यूमिनियम, गैस और अन्य औद्योगिक संसाधनों की सप्लाई में व्यवधान से इंदौर की मैन्युफैक्चरिंग इकाइ‌यों की उत्पादन लागत बढ़ गई है।

महंगाई का 'ट्रिपल' अटैक

तेल की कीमतों में यह वैश्विक उछाल केवल वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके चार और खतरनाक प्रभाव हो रहे हैं….

ट्रांसपोर्टः माल ढुलाई महंगी होने से हर छोटी-बड़ी चीज की कीमत बढ़ने लगी हैं।

खेतीः फर्टिलाइजर खासकर यूरिया उत्पादन महंगा होने से अनाज के दाम बढ़ रहे हैं।

मैन्युफैक्चरिंग : फैक्ट्रियों में लागत बढ़ने से सामान की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे 2008 जैसी वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है। लोहा, स्टील, सीमेंट और केमिकल जैसी बड़ी फैक्ट्रियों में भारी मशीनें चलाने के लिए डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल होता है। ईंधन महंगा होने से सामान बनाने की लागत बढ़ रही है।

सूखे मेवे: युद्ध से सूखे मेवों का आयात बंद हो गया है। खासकर ईरानी सूखे मेवों की आपूर्ति ठप हो गई है जिससे कीमतें आसमान छू रही हैं।

बाजार में बढ़ते दाम

मूंगफली तेल- 210
सोयाबीन तेल- 180
सरसो तेल- 190
चना दाल-110
तुवर दाल- 145
चावल बासमती- 95
ईरानी पीस्ता- 2500

कच्चे माल में उछाल

कॉपर रिंग्स- 17.1 %
एल्युमि. पाउडर- 17.5%
पीतल- 24.1%
कॉपर वायर- 20.7 %
लूज तेल- 30%