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डिजाइन और मेन्यूफेक्चरिंग स्टार्टअप को मिलेगा मौका

सौ सीटों का होगा नए आईटी पार्क का इन्क्यूबेशन सेंटर

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yogi adityanath

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इंदौर @ न्यूज टुडे. क्रिस्टल आईटी पार्क में 35 सीटर इन्क्यूबेशन सेंटर के बाद अब नए आईटी पार्क में भी एक इन्क्यूबेशन सेंटर की प्लानिंग की जा रही है। एकेवीएन इसे सौ सीटों का बनाएगा। आईटी कंपनियां ही नहीं, डिजाइन और मेन्यूफेक्चरिंग कंपनियों को भी स्टार्टअप शुरू करने का मौका मिलेगा।

क्रिस्टल आईटी पार्क में सृजन के नाम से 2016 की शुरुआत में यह सेंटर शुरू हुआ था। दो साल के सक्सेस रेट को देखते हुए एकेवीएन नए आईटी पार्क में भी ऐसा ही सेंटर विकसित करने जा रहा है। इसके लिए एक पूरा फ्लोर रखा गया है। इस सेंटर में आईटी कंपनियों को तो जगह मिलेगी ही, प्राथमिकता में डिजाइनिंग और मेन्यूफेक्चरिंग सेक्टर की वे कंपनियां रहेंगी, जो प्रोडक्ट डिजाइन और मॉडल डेवलपमेंट जैसे सेक्टर में काम करना चाहती हैं। ऐसी कंपनियों के लिए यहां डिजाइनिंग और मेन्यूफेक्चरिंग से जुड़े वर्कशॉप भी विकसित किए जाएंगे।

बिजनेस जमाओ और बाहर
इस सेंटर में हर महीने नए-नए आइडिया के साथ स्टार्टअप लेकर आ रहे हैं। इनमें से जो भी पैरों पर खड़ा होता है, यानी बिजनेस जमा लेता है, वह सेंटर से बाहर हो जाता है, फिर इसकी जगह कोई नई कंपनी आ जाती है। सृजन से अब तक सात ऐसी कंपनियां बिजनेस जमाकर निकल चुकी हैं। 10 वर्तमान में काम कर रही हैं।

पीपीपी पर चलेगा सेंटर
क्रिस्टल आईटी पार्क का सेंटर तो एकेवीएन खुद चला रहा है, लेकिन नया सेंटर पीपीपी मोड पर लाने की योजना है। यह सेंटर किसी भी फर्म को संचालन के लिए दिया जाएगा। एकेवीएन उससे एकमुश्त पैसा लेगा। इसके बाद उक्त फर्म ही सेंटर के रेट तय करेगी और वहां आने वाली स्टार्टअप कंपनियों को चुनेगी। एकेवीएन के मेंटर का मार्गदर्शन और निगरानी जरूर रहेगी।

नए इन्क्यूबेशन सेंटर की अवधारणा अलग होगी। यह आईटी के अलावा अन्य सेक्टर के लिए भी खुला रहेगा और ज्यादा सुविधाएं व संसाधन देने के लिए संचालन को पीपीपी मोड पर निजी फर्म को दिया जाएगा।
कुमार पुरुषोत्तम, एमडी एकेवीएन

17 कंपनियां खड़ी हुईं सृजन में
क्रिस्टल आईटी पार्क में दो साल पहले इन्क्यूबेशन सेंटर उन छोटी आईटी कंपनियों और प्रोफेशनल के लिए शुरू किया गया था, जो स्टार्टअप तो लाना चाहते थे, लेकिन संसाधन नहीं जुटा पा रहे थे। इन कंपनियों को बहुत कम रेट पर प्लग एंड प्ले की सुविधा दी गई। दो साल में 17 कंपनियों की सक्सेस स्टोरी एकेवीएन के पास है, जिनमें से कई कंपनियों ने आज ग्लोबल मार्केट में अपनी पहचान बना ली है।