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यहां माता पूरी करती है कोर्ट केस में जीत और संतान की मन्नत, नौ रूपों में स्वयंभू हुई थीं प्रकट

एक हजार साल पुराना है माता का ये मंदिर, तंत्र-मंत्र और सिद्धि के लिए है मशहूर

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इंदौर

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Reena Sharma

Apr 11, 2019

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यहां माता पूरी करती है कोर्ट केस में जीत और संतान की मन्नत, नौ रूपों में स्वयंभू हुई थीं प्रकट

इंदौर. बिजासन माता का भारत का पहला ऐसा मंदिर है जो नौ दुर्गा के रूप में स्वयंभू स्थापित हुआ था। बिजासन टेकरी पर बसें इस मंदिर में लाखों श्रृध्दालु रोजाना माता के दर्शन के लिए पहुंचते है। यहां कोर्ट केस में जीत और संतान की मन्नतें पूरी होती है।

बिजासन माता मंदिर के पुजारी सतीशवन गोस्वामी ने बतायावर्ष 1993 में होल्कर के राजा ने इस मंदिर को बनावाया था। एक दिन जब वे अपनी प्रजा के साथ इस मंदिर के सामने से गुजर रहे थे तब यहां ढोल-ढमाके की आवाज सुनकर उन्होंने किसी से मंदिर के बारे में पूछा, उन्हें किसी ने बताया कि यहां संतान प्राप्ति की मन्नतें मांगी जाती है तब राजा ने भी संतान की मन्नत मांगी और मन्नत पूरी होते ही उन्होंने मंदिर को बनवाया। बिजासन माता इंदौरियों की कुलदेवी है। यह भारत का पहला ऐसा मंदिर है नौ दूर्गा है रूप में स्वयंभू स्थापित हैं।

तंत्र-मंत्र, सिध्दि के लिए है मशहूर
मंदिर का इतिहास एक हजार साल पुराना है। यहां देवी के नौ स्वरूप विराजमान हैं। किसी जमाने में आसपास काले हिरणों का जंगल होने और तंत्र-मंत्र, सिद्धि के लिए इस मंदिर की खास पहचान रही है। पूर्व में माता चबूतरे पर विराजित थीं। मंदिर का निर्माण इंदौर के महाराजा शिवाजीराव होलकर ने 1760 में कराया था।

विशेषता - बिजासन माता को सौभाग्य और पुत्रदायिनी माना जाता है। इसके चलते विवाह के बाद यहां प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर से नवयुगल माता के दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। बताया जाता है कि आल्हा-उदल ने भी मांडू के राजा को हराने के लिए माता से मन्नत मांगी थी।

वास्तुकला - साधारण मिट्टी, पत्थर के चबूतरे पर विराजमान माता के नौ स्वरूपों के लिए तत्कालीन होलकर शासक ने यहां मराठा शैली में मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में कई विकास कार्य हुए और अब यहां पंडि़तों के लिए भी अलग से आवास की व्यवस्था कर दी गई है।

मंदिर से जुड़े आयोजन - चैत्र और शारदीय नवरात्र में मंदिर में मेला लगाया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक नवरात्र के दौरान यहां देशभर से लगभग 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए आते हैं।

चमत्कारिक और सिध्द है माता का स्थान

तंत्र-मंत्र शास्त्र की मान्यताओं के मुताबिक पर्वतीय स्थल पर स्थित दैवीय स्थानों में सिद्धियों का आह्वान करने और उन्हें जाग्रत करने का श्रेष्ठ स्थान है। पुरातन तंत्र विद्या पत्रिका 'चंडी' में इंदौर के बिजासन माता मंदिर में विराजमान नौ दैवीय प्रतिमाओं को तंत्र-मंत्र का चमत्कारिक स्थान व सिद्ध पीठ माना गया है। किसी समय बुंदेलखंड के आल्हा-उदल अपने पिता की हत्या का बदला लेने मांडू के राजा कडांगा राय से लेने यहां आए, तब उन्होंने बबरी वन (बिजासन) में मिट्टी-पत्थर के ओटले पर सज्जित इन सिद्धिदात्री नौ दैवीयों को अनुष्ठान कर प्रसन्न किया और मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। तब से देवी को बिजासन माता के नाम से जाना जाता है।

मछलियों को दाना खिलाने से मिलता है पुण्य

मंदिर प्रांगण में एक पवित्र तालाब भी है। इस तालाब में बड़ी तादाद में मछलियां हैं। मंदिर दर्शन करने आने वाले भक्तों की मान्यता है कि मछलियों को दाना खिलाने से पुण्य मिलता है और मां उनकी मुराद जरूर पूरी करती हैं। माता टेकरी पर बसी है और यहां से शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।