23 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मानव कल्याण के लिए बने ‘महावीर’,  राजसी जीवन छोड़ अपनाया था वैराग्य

राजपरिवार में जन्में महावीर को वर्धमान नाम से जाना जाता था। वर्धमान ने सभी राजसी सुविधाओं का त्याग कर धर्म के कठिन मार्ग को अपनाया।

2 min read
Google source verification

image

Narendra Hazare

Apr 19, 2016

Mahaveer

Mahaveer

महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख त्यौहार है। इस दिन जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था। मानव जाति को अहिंसा का पाठ पढाने वाले भगवान महावीर ईसा 599 वर्ष पूर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी को बिहार के लिच्छवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और देवी त्रिशिला के यहां जन्मे थे। राजपरिवार में जन्में इस बालक को वर्धमान नाम से जाना जाता था। वर्धमान ने सभी राजसी सुविधाओं का त्याग कर धर्म के कठिन मार्ग को अपनाया। वर्धमान ने अपने कठोर तप से समस्त इंद्रियों पर विजय प्राप्त की। कठिन तप भी एक पराक्रम के समान ही होता है इसीलिए वर्धमान को महावीर नाम से जाना जाने लगा।

वर्धमान से बने महावीर
वर्धमान जैसे जैसे बड़े हो रहे थे वैसे वैसे ही उनका तप और पराक्रम भी बढ़ता जा रहा था। एक बार सुमेरू पर्वत पर देवराज इंद्र उनका अभिषेक कर रहे थे। तब देवराज ने इस बात से भयभीत होकर कि कहीं जल के प्रवाह से यह बालक बह ना जाए, उन्होंने अभिषेक रूकवा दिया। वर्धमान ने उनके मन की बात भाप कर अपने अंगूठे से सुमेरू पर्वत को दबाना शुरू कर दिया। इस दाब से सुमेरू पर्वत कंपायमान हो गया। यह देखकर देवराज इंद्र को उनकी शक्ति का अनुमान हो गया और उन्होंने वर्धमान को वीर के नाम से संबोधित करना शुरू कर दिया।

अंहिसा परमोधर्म
जिस समय में भगवान महावीर का जन्म हुआ उस समय हिंसा, पशुबलि और जाति भेदभाव का बोलबाला था। तब भगवान महावीर ने लोगों को जियो और जीने दो के सिद्धांत पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने मानव जाति को अहिंसा की शिक्षा दी। उन्होंने मनुष्य को सिखाया कि मन, कर्म वचन से शुद्ध होकर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

भगवान महावीर के प्रमुख संदेश
भगवान महावीर ने मनुष्य जाति को अंहिसा के मार्ग पर चलने के साथ ही कई प्रमुख संदेश दिए। उनके संदेशों में कुछ प्रमुख संदेश -
- सदा सत्य बोलना चाहिए।
- निर्बल, निरीह और असहाय व्यक्तियों को ही नहीं बल्कि पशुओं को भी नहीं सताना चाहिए।
- मनुष्य का मन, कर्म और वचन शुद्ध होना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- मनुष्य को अपने जीवन में देशाटन और ज्ञानार्जन अवश्य करना चाहिए।
- चोरी कभी नहीं करनी चाहिए।