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Janmashtami : भगवान कृष्ण को कैसे और क्या लगाएं भोग, ये हैं पूरी विधि, माखन खाने ऐसे आते हैं लड्डू गोपाल

कृष्ण जन्माष्टमी 24 अगस्त को, पंचामृत और गंगाजल से करे स्नाना, होगा आपका उद्धार

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इंदौर

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Reena Sharma

Aug 18, 2019

indore

Janmashtami : भगवान कृष्ण को कैसे और क्या लगाएं भोग, ये हैं पूरी विधि, माखन खाने ऐसे आते हैं लड्डू गोपाल

इंदौर. श्रीकृष्ण का जन्मदिन पूरी दुनिया में जन्माष्टमी के दिन बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। भव्य उत्सव तो होता ही है बल्कि खास तरह की साज-सज्जा भी होती है। उत्सव की तरह मनाए जाने वाले इस दिन के लिए लोगों की तैयारियां भी जमकर होती है। ऐसे में कई लोग इस दुविधा में रहते हंै कि लड्डू गोपाल की पूजा कैसे करें और उन्हें कैसे भोग लगाएं और भोग में क्या लगाएं? ऐसे में हम आपकी इस दुविधा को दूर करने के लिए बता रहे हैं विशेष पूजन की तैयारियां और विधि।

कई लोग मन में सोचते हैं कि मंदिर में रखे जितने भी कान्हा है क्या सभी को अलग-अलग भोग लगाना चाहिए और क्या राधा-रानी को भी अलग से भोग लगाना चाहिए। तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। लड्डू गोपाल को आप एक ही थाली में भोग लगा सकते हैं। राधा-रानी भी भगवान कृ ष्ण से अलग नहीं है इसलिए वे भी उस भोग को स्वीकर करती हैं।

दिनभर में चार समय लगाएं भोग

सुबह नाश्ता, दिन का खाना, दोपहर का नाश्ता और फिर रात का खाना के अलावा सोते समय उन्हें दूध का भी भोग लगाना चाहिए। भोग लगाने के लिए जरूरी नहीं है कि आप कोई पकवान ही बनाएं, आप बाल गोपाल को माखन मिश्री का भी सादा भोग लगा सकते हैं, लेकिन हर भोग में तुलसी जी जरूर डालना चाहिए। इसके अलावा उनसे इस दौरान प्रार्थना जरूर करें कि वे भोग को स्वीकारें और लंच व डीनर के दौरान जो भी घर में बनें उसका भोग लगा सकते हैं। दोपहर के समय फल और सुबह व रात को दूध भोग में रखने से भी भगवान प्रसन्न होते हैं।

चांदी नहीं तो स्टील का बर्तन

जरूरी नहीं है कि आप लड्डू गोपाल को चांदी के बर्तन में भोग लगाएं बल्कि स्टील के बर्तन में भी भोग लगा सकते हैं। उनके बर्तन आपको अलग ही रखना चाहिए, इससे वे हमारे बर्तन में खाना नहीं खाते हैं, उनके अलग बर्तन में भोजन करेंगे। प्रसाद के रुप में ग्रहण करें और जो बच जाता है उन्हें अपने खाने में मिला दें और सभी उसे ग्रहण करें। सभी को एक ही साथ भोजन करवा सकते हैं।

ऐसे बुलाएं कान्हा को भोग लगाने

सबसे पहले चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर चौकी रखें और फिर कृष्ण भगवान को उस पर बैठाएं। चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान को विराजमान करें। अब प्रार्थना करें कि है भगवान आप आइए और विराजमान हो और इस भोग को स्वीकार करें। इस दौरान उन्हें धूप बत्ती भी जलाएं और पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराएं।

तुलसा जी के बिना प्रभु ग्रहण नहीं करते भोग

अष्टगंध लगाकर उनका स्मरण करें। माखन मिश्री और अन्य भोग लगाएं और उसमें तुलसा जी डालना न भूले क्योंकि भगवान कान्हा तुलसा जी के बिना भोग ग्रहण नहीं करते हंै। अब ऐसा स्मरण करें कि भगवान कान्हा जी बाल गोपाल के रूप में पीपल के पत्ते पर लेेेटे हैं और अंगूठा चूस रहे हैं। उन्हें प्रणाम करके अपने चरणों में स्थान देने की प्रार्थना करें और पूजा में पधारने के लिए धन्यवाद देते हुए उन्हें पुन अपने दिव्य धाम को पधारने का कहिए। जल व फूल हाथ में लेकर चौकी पर अर्पण कर दें।