
#CoronaWarriors : वैश्विक महामारी के बीच क्लिनिक पर करते रहे बीमारों की सेवा, कोरोना से हारे जंग
इंदौर/ वैश्विक महामारी बनकर अब तक लगभग पूरी दुनिया को अपने ज़द में ले चुके कोरोना वायरस का प्रकोप मध्य प्रदेश में भी अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में अब रोजाना पिछले दिन के मुकाबले कई अधिक मामले सामने आने से स्वास्थ विभाग की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। खुद स्वास्थ विभाग भी अब इस महामारी से अछूता नहीं है। प्रदेश में सबसे खराब हालात देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के हैं। हद तो ये है कि, ये शहर उन लोगों की भी जान जाने का गवाह बना है, जो खुद दूसरों की जान बचाते हैं। जी, हां डॉक्टर इंदौर में कोरोना का शिकार होकर अब तक दो डॉक्टर भी अपनी जान गवा चुके हैं। कोरोना के कारण इसी शहर में हुई डॉक्टरों की मौत देश की पहली दो मौतें हैं। इन्ही दोनो चिकितसकों में से एक हैं, डॉक्टर ओमप्रकाश चौहान, जो इस वैश्विक महामारी के बीच भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए कोरोना की चपेट में आए और अपनी जान गंवा दी।
कोरोना का शिकार देश के दूसरे डॉक्टर ने गवाई जान
आपको बता दें कि, शहर में रहने वाले एमबीबीएस डॉक्टर शत्रुघन पंजवानी की कोरोना की जद में आने के बाद गुरुवार को मौत हो गई थी। प्रदेश अभी इस अपूर्णिये छति से उबरा भी नही था कि, शुक्रवार को शहर के ही रहने वाले आयुष डॉक्टर ओमप्रकाश चौहान की मौत की खबर ने स्वास्थ विभाग समेत प्रदेश के हर एक नागरिक को गहरी चौट पहुंचाई। डॉक्टर चौहान के परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा करने का प्रयास किया। इस वैश्विक महामारी के बीच भी उन्होंने लोगों की सेवा को ही अपना पहला कर्तव्य माना और इस मुश्किल दौर में जब कई अस्पताल चाहकर भी किसी अन्य मर्ज के मरीजो को देखने में असफल हैं। तो डॉक्टर चौहान अपने क्लिनिक पर उन मरीजों की तकलीफ दूर करने के लिए उनकी सेवा में लगे थे। इस दौरान ही वो किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर खुद भी कोरोना के मरीज बन गए थे।
शहर के अरविन्दो अस्पताल में ली अंतिम सांस
इंदौर की ब्रह्मबाग कॉलोनी में वो बीते कई सालों से अपने प्राइवेट क्लिनिक पर आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की इलाज करते थे। उनके एक मरीज ने बताया कि, उनकी उम्र 65 साल थी, लेकिन वो उस उम्र में भी एकदम फिट थे। उन्हें पता ही नहीं चल सका कि, कब वो इस भयानक बीमारी की जद में आ गए। शुरुआत के लक्षणों के हिसाब से जब उन्हें गले में खराश और बुखार की शिकायत हुई तो उन्हें तत्काल नजदीक के सुयश अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं 7 दिनों तक भर्ती रहने के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया तो उन्हें अरविन्दो अस्पताल में भर्ती कराया गया। इन सात दिनों में उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी और शुक्रवार को उपचार के दौरान उनकी मौत गई।
लोगों की सेवा को समझा मानव धर्म
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉ. ओमप्रकाश चौहान की तीन दिन पहले ही कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बताया जा रहा है कि वो पहले से ही डायबिटीज के मरीज थे, लेकिन लॉकडाउन के बीच भी अपने निजी क्लिनिक में कोरोना से अन्य परेशानियों से ग्रस्त मरीजों की सेवा कर रहे थे और यहीं वो कोरोना से संक्रमित हो गए थे।
20 जनवरी से अवकाश पर थे डॉ. ओमप्रकाश
आपको बता दें कि, डॉक्टर चौहान इंदौर से 60 किलोमीटर दूर धार जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। वो पूर्व प्रभारी जिला आयुष अधिकारी धार के पद पर भी पदस्थ रहे। वे शासकीय आर्युवेद औषद्यालय में धार में पदस्थ थे, लेकिन वो 2015 -2016 से ही चिकित्सीय कार्य नहीं कर रहे थे। विभाग की ओर से उन्हें कोर्ट संपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बावजूद वो 20 जनवरी 2020 से अर्जित अवकाश पर थे। अवकाश काल में डॉ. ओमप्रकाश अपने घर पर स्थित क्लीनिक से ही मरीज देखते थे।
तेजी से बिगड़ रहे हैं शहर के हालात
आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश में कोरोना का सबसे अधिक असर इंदौर में दिख रहा है। जहां देशभर में कोरोना से ग्रस्त मरीजों की मौत का प्रतिशत मौत का प्रतिशत 3.5 फीसदी के करीब है। वहीं, सिर्फ इस शहर में कोरोना का शिकार हुए लोगों में मरने वालों का प्रतिशत 12 फीसदी से अधिक हो चुका है, जो बेहद चौराने वाला है। बता दें कि, अब तक शहर में कोरोना से संक्रमितों की संख्या 249 हो चुकी है, जबकि 30 लोग अब तक अपनी जान गवा चुके है।
Published on:
12 Apr 2020 04:15 pm
