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इंदौर. बहुचर्चित कविता रैना हत्याकांड मामले में सेशन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपित महेश बैरागी को बरी कर दिया। इस फैसले ने पुलिस की शैली और कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने चालान डायरी में सबसे अहम माने जाने वाले सीसीटीएनएस की रिपोर्ट पेश नहीं की और साधारण कागजों में रिपोर्ट पेश कर दी। इस वजह से पूरा केस संदेह के घेरे में आ गया।
मित्रबंधु नगर निवासी कविता रैना 24 अगस्त 2015 को स्कूल से लौट रही बेटी को लेने के लिए बस स्टैंड पर जा रही थी, वहां से गायब हो गई थी, बाद में उसका शव नौलखा क्षेत्र के नाले में 6 टुकड़ों में बोरे में मिला था। 9 दिसंबर को पुलिस ने महेश बैरागी को हत्या का आरोपित बनाकर पेश कर दिया।
ढाई साल चले केस में स्पेशल सेशन जज बीके द्विवेदी ने बैरागी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने फैसले में कई बिंदुओं पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। पुलिस द्वारा पेश किए गए चालान में कई प्रकार की खामियां थीं।
पुलिस ने अपने ऑनलाइन रोजनामचा की रिपोर्ट पेश नहीं की। पूरे केस को साधारण कागजों में बनाकर पेश कर दिया, जो पूरे मामले में संदेह पैदा कर रहा था।
आधारभूत दस्तावेजों में पुलिस मात खा गई, जिसने पूरे केस को कमजोर कर दिया। वहीं पुलिस न कोई ठोस सबूत पेश कर पाई न मजबूत प्रत्यक्षदर्शी गवाह। पुलिस ने बैरागी के मोबाइल टॉवर की लोकेशन को आधार बनाया था, जिस पर कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि आरोपित वहीं रहता है, जिससे लोकेशन मिल सकती है।
पुलिस के अनुसार बैरागी ने तेश में आकर रैना की हत्या की थी, जबकि हत्या के तरीके से ऐसा नजर नहीं आया। पूरे मामले में 80 अधिकारियों को डीआईजी संतोष कुमार सिंह ने काम पर लगा रखा था।
59 संदिग्धों पर नजर
पुलिस ने बताया कि केस में 59 लोगों पर उनकी नजर थी, जिनसे पूछताछ की गई थी। लगातार निगरानी के बाद बैरागी को आरोपित किया गया था, इसके बावजूद पुलिस उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई।
रीगल तिराहे पर हुआ था बवाल
गौरतलब है कि पुलिस पर लगातार दबाव बना हुआ था। पुलिस की नाकाम साबित हो रही थी इस बीच में रीगल तिराहे पर 7 दिसंबर 2015 को सैकड़ों वर्ग विशेष के युवा इकट्ठा हो गए थे। वे अखिल भारतीय हिंदू महासभा द्वारा मोहम्मद पैगम्बर साहब पर की गई टिप्पणी के विरोध कर रहे थे।
उपद्रवियों ने गाड़ी और कई शो रूम पर पत्थरबाजी की थी। वहीं पुलिस महकमे को इतने बड़े बवाल की जानकारी भी नहीं लगी। उस दौरान डीआईजी संतोष कुमार सिंह अपने कार्यालय पर ही बैठे थे, जब पुलिस को कटघरे में खड़ा किया गया तो उसके दो दिन बाद बैरागी को पेश करके रैना हत्याकांड का खुलासा करने का पुलिस ने दावा किया था।
Published on:
19 May 2018 02:17 pm
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