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भू-माफिया बॉबी छाबड़ा के कब्जे से मुक्त हो सकता है खालसा कॉलेज

12 अगस्त को अकाल तख्त ने अमृतसर में बुलाई बैठक, इंदौर के प्रमुख सिख नेता होंगे शामिल।

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भू-माफिया बॉबी छाबड़ा के कब्जे से मुक्त हो सकता है खालसा कॉलेज

भू-माफिया बॉबी छाबड़ा के कब्जे से मुक्त हो सकता है खालसा कॉलेज

इंदौर. भू-माफिया बॉबी छाबड़ा के कब्जे से जल्द ही खालसा कॉलेज मुक्त हो सकता है। करीब ढाई दशक से कॉलेज पर छाबड़ा ने कब्जा कर रखा है। दरअसल, कॉलेज को छाबड़ा से मुक्त कराने के लिए समाजजन चुनाव की मांग कर रहे हैं। मामला अब अकाल तख्त तक पहुंच गया है। 12 अगस्त को अमृतसर में बैठक बुलाई गई है, जिसमें एजुकेशन सोसायटी और श्री गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष को बुलाया गया है। गृह निर्माण संस्थाओं के सदस्यों के हक वाली जमीन की खरीद-फरोख्त करने वाले भू-माफिया बॉबी छाबड़ा ने सिख समाज की खालसा एजुकेशन सोसायटी पर भी कब्जा कर रखा है। पिछले 26 साल से संस्था में चुनाव नहीं हो सके हैं। बॉबी ने अपने खास 300 सदस्यों की कमेटी बनाई है, जो आपस में वोट डालकर पदाधिकारी चुन लेते हैं। संस्था पर छाबड़ा के कब्जे को लेकर समाजजनों ने कई बार आंदोलन किया। उनका कहना है, सोसायटी पूरे समाज की है, जिसमें वोट डालने का अधिकार सभी को होना चाहिए।

अकाल तख्त से की थी शिकायत
समाजजनों का कहना है, जैसे श्री गुरुसिंघ सभा के चुनाव होते हैं, वैसे ही खालसा एजुकेशन के भी चुनाव हों। इसको लेकर पिछले दिनों श्री गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष रिंकू भाटिया और महासचिव राजा गांधी ने अकाल तख्त के जत्थेदार से बात की थी। उनसे कहा गया था कि अकाल तख्त को श्री गुरुसिंघ सभा के साथ खालसा एजुकेशन के भी साथ चुनाव कराने का लिखकर दिया था। लेकिन, सिर्फ सभा के चुनाव हो रहे हैं, जो गलत है। संगत चाहती है कि एजुकेशन सोसायटी के चुनाव हो और वहां भी समाज द्वारा चुने गए प्रतिनिधि उसका संचालन करें।

समाजजन को न्याय की उम्मीद

पदाधिकारियों का कहना है कि इसको लेकर अकाल तख्त ने 12 अगस्त को अमृतसर में बैठक बुलाई है। उसमें सोसायटी के अध्यक्ष चरणजीतसिंह सैनी, सचिव बॉबी छाबड़ा और श्री गुरुसिंघ सभा अध्यक्ष रिंकू भाटिया व अन्य को बुलाया गया है। संभावना है कि अकाल तख्त न्याय करते हुए सोसायटी के चुनाव को सिख संगत के रूप में कराने का फैसला कर सकती है। उसके चुनाव सभा के साथ हो सकते हैं।

छाबड़ा नहीं चाहता कब्जा छोड़ना

जमीन के जालसाज बॉबी छाबड़ा नहीं चाहता कि खालसा कॉलेज से उसका कब्जा हटे, क्योंकि उसने कॉलेज को अपना अड्डा बना रखा है। जमीन कारोबार सहित अन्य मामलों में उसे किसी से मिलना होता है तो वह उन्हें कॉलेज में बुलाता है। इसके अलावा कॉलेज के पास शहर के बीचों-बीच बड़ी जमीन है जिस पर दर्जनों दुकानें हैं, जिनका किराया आता है। उसको लेकर भी कई बार सोसायटी पर काबिज पदाधिकारियों के विरोध में कई तरह के आरोप भी लगाए।