
जमीन के जालसाज ने रचा नया चक्रव्यूह, जरा सी चूक में उलझ सकते है अफसर
मोहित पांचाल
इंदौर। गृह निर्माण संस्थाओं की जमीनों की खरीदफरोख्त करने वाला जमीन का जालसाज दीपक जैन उर्फ मद्दा ने एक नया चक्रव्यूह रचा। मुख्यमंत्री की भावनाओं का हवाला देकर संस्था की खरीदी जमीन को बचाने का प्रयास कर रहा है, जिसमें सरकारी महकमे ने थोड़ी भी गलती की तो वह उलझ सकता है। कहना है कि जमीन पर फ्लैट बनाकर सदस्यों को दे दिए जाएं, मैं इस पुनीत कार्य में आपके साथ हूं।
मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की घोषणा के बाद में जिला प्रशासन ने गृह निर्माण संस्था के सदस्यों को न्याय दिलाने का अभियान शुरू किया था। उस दौरान संस्थाओं की जमीन की खरीद-फरोख्त करने वालों पर एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए। उसमें दीपक जैन उर्फ दिलीप सिसोदिया उर्फ मद्दा पर भी
करीब आधा दर्जन प्रकरण दर्ज हुए। लंबे समय फरारी काटने के बाद मद्दा को कोर्ट से जमानत मिल गई, जिसके बाद से वह एक बार फिर सक्रिय हो गया है। इस बार उसने तरीका बदल दिया।
खजराना की हिना पैलेस में श्रीराम गृह निर्माण संस्था की जमीन को लेकर सहकारिता विभाग को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा, जो किसी चक्रव्यूह से कम नजर नहीं आ रहा है। मद्दा का कहना है कि गैर आवासीय जमीन है। ऐसी जमीन पर संस्था सदस्यों की कॉलोनी का विकास नहीं किया जा सकता, लेकिन मुख्यमंत्री ने गृह निर्माण संस्थाओं के सदस्यों के आवास की समस्या का हल करने के लिए तत्परता दिखाई थी। कलेटर ने भी सहकारिता विभाग के अफसरों की समय-समय पर दिशा निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने खुले मंच से संस्था के सदस्यों की आवासीय समस्या का तुरंत हल करने के निर्देश दिए हैं। मैं इस पुनीत काम में सहभागी बनकर प्रशासन की मदद के लिए तत्पर हूं। संस्था के पात्र सदस्यों के लिए पूर्व में ही आवासीय प्रयोजन की जमीन मौजूद है। मेरी खरीदी गई जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने का आदेश किया जाता है तो मैं लागत मूल्य पर सदस्यों को फ्लैट आवंटित करने के लिए तत्पर रहूंगा।
वास्तविकता तो ये है कि संस्था ने अपने सदस्यों के साथ मुझे भी धोखा दिया है। इसके बाद प्रशासनिक व सहकारिता विभाग पत्र के मायने निकाल रहा है। हालांकि आखिर में मद्दा ने इशारों-इशारों में जमीन को लौटाने की भी बात कही है। ऐसा होता है तो ठीक है, लेकिन फ्लैट को लेकर अनुमति दी गई तो अफसर उलझ सकते हैं, योंकि गृह निर्माण संस्था अपने सदस्यों को फ्लॉट दे सकती है न कि फ्लैट।
कैसे खरीदी जमीन...बताया
मद्दा का कहना है कि खजराना में 41.5 एकड़ जमीन श्रीराम गृह निर्माण सहकारी संस्था के स्वामित्व की थी। संस्था की 10 नंबर 2005 में एक साधारण सभा हुई थी, जिसमें गैर आवासीय जमीन को बेचने का फैसला किया गया था। संस्था के पास करीब आठ हेटेयर जमीन प्रशासनिक, सेटर उद्यान, वाणिज्यिक, सड़क व सामान्य उपयोग के लिए थी। तब संस्था ने सहकारिता विभाग से अनुमति लेकर जमीन बेचने की अनुमति ली और फिर उसे नीलाम किया जिसमें तीन रजिस्ट्रियों के माध्यम से मैंने खरीदी।
ये हुई थी कलाकारी
खजराना की अवैध हिना पैलेस कॉलोनी को वैध करके मद्दा, जितेंद्र धवन, राजीव धवन, श्रीधर, श्रीराम सेवक पाल, गुलाम हुसैन और रमेश जैन ने मिलकर एक खेल किया था। मद्दा ने श्रीराम गृह निर्माण संस्था की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदने के हिना पैलेस में उसे जुड़ा दी। बाकी जालसाजों ने भी अपनी संस्था की जमीनों को उसमें शामिल कर दिया था। वैध करके प्लॉटों को बेचने की तैयारी थी। एक तरफ तो संस्था से जमीन बाहर होकर कीमती भी हो गई। इस पर नगर निगम ने सभी के खिलाफ खजराना थाने पर मुकदमा दर्ज किया।
Published on:
21 Sept 2022 11:29 am
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