13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Election 2019 : पारंपरिक चेहरा हटते ही बढ़ा कन्फ्यूजन, समाजों को साधने में लगी कांग्रेस-भाजपा

पारंपरिक चेहरा हटते ही बढ़ा कन्फ्यूजन, समाजों को साधने में लगी कांग्रेस-भाजपा

2 min read
Google source verification

इंदौर

image

Hussain Ali

Apr 26, 2019

इंदौर. चुनाव में इंदौर का पारंपरिक चेहरा हटते ही वोट बैंक को लेकर दोनों ही दल असमंजस में है। अभी तय करना मुश्किल है कि कौन किसके पक्ष में जाएगा और किस हद तक मतदान करेगा। ऐसी स्थिति में दोनों ही दल समाजों को साधकर चुनाव वैतरणी पार करने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं। कांग्रेस के पंकज संघवी और भाजपा के शंकर लालवानी को मैदान में उतारने के पीछे भी सामाजिक वोट बैंक बड़ा कारण रहा है। हालांकि दोनों के सामाजिक वोट शहरी क्षेत्र तक सीमित हैं। ऐसे में ग्रामीण वोट भी अहम हो गए हैं।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते में तीन ग्रामीण सीटें हैं। ग्रामीण सीटों से लगातार 8 बार सुमित्रा महाजन को समर्थन मिलता रहा है, लेकिन भाजपा में नए चेहरे और अंदरुनी गुटबाजी परेशानी खड़ी कर रही है। इंदौर में जातिगत समीकरण की बात करें तो हर विधानसभा में अलग-अलग धर्म व समाज के लोगों का वर्चस्व है। इंदौर लोकसभा सीट में जिले की पूरी आबादी नहीं आती, क्योंकि महू धार में है। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, जिले की कुल आबादी 35,76,877 है, इनमें से वोटर 23 लाख 37 हजार 523 हैं। शहरी विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम, मराठी और वैश्य वोटर सबसे ज्यादा हैं। ग्रामीण सीटों पर राजपूत, खाती, कलौता समाज की संख्या ज्यादा है। पिछले लोकसभा चुनाव में ग्रामीण सीटों पर ज्यादा वोटिंग हुई है।

दावेदारों के समीकरण

पंकज संघवी : गुजराती समाज के साथ वैश्य समाज की ओर से दावेदारी जता रहे हैं। दोनों ही समाजों में उनकी पकड़ है, खुद की लंबी टीम भी है। मुस्लिम वोट बैंक उनके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। चुनौती युवा वोटरों को अपने पक्ष में करना है, जो अब तक मोदी लहर से प्रभावित दिख रहे हैं। शहरी सीटों पर संघ और भाजपा संगठन के मुकाबले पार्टी के सभी धड़ों को एक करना जरूरी होगा। कार्यालय उद्घाटन के दौरान हुए ड्रामे के बाद यह आसान नहीं दिखता।

शंकर लालवानी : सिंधी समाज का फायदा दो नंबर विधानसभा में मिल सकता है। चुनाव जीतने के लिए उन्हें सभी विधानसभा में पटरी बैठाना होगी। सबसे बड़ा रोड़ा पार्टी के टिकट घोषित करने में देरी से तैयार हुए दावेदार साबित होंगे। ग्रामीण विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा जोर लगाना पकड़ेगा। लालवानी इससे पहले पार्षद का चुनाव ही लड़े हैं, चुनाव मैनेजमेंट के लिए खुद की उतनी मजबूत टीम अभी नहीं जुट पाई है। संगठन पर बहुत कुछ निर्भर करेगा।
लोकसभा में समाज के वोटों की संख्या

राजपूत : करीब चार लाख
ब्राह्मण : करीब चार लाख
वैश्य : करीब चार लाख
मुस्लिम : करीब तीन लाख
मराठी : करीब डेढ़ लाख
खाती : करीब दो लाख
कलौता : करीब एक लाख
जैन : करीब एक लाख
वाल्मिकी : करीब 80 हजार
ंिसंधी : करीब 75 हजार
सिख : करीब 40 हजार
मुराई-कुशवाह : करीब 60 हजार
गुजराती : करीब 35 हजार