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जीएसटी से घाटा, असेसमेंट से जुटा रहे 300 करोड़ रुपए

सरकारी अर्थव्यवस्था चरमराई...

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इंदौर. पहले नोटबंदी, अब जीएसटी की मुश्किल से सरकारी अर्थव्यवस्था चरमराने लगी है। हर विभाग को लक्ष्य तो दूर, बीते साल मिले राजस्व के बराबर भी राशि नहीं मिल रही है। वाणिज्यिक कर विभाग के लिए इस साल करीब 31 हजार करोड़ का लक्ष्य रखा गया था। जीएसटी लागू होने के बाद विभाग का आर्थिक गणित गड़बड़ा गया। अब सरकार ने विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बीते साल के असेसमेंट तेजी से निपटाएं। विभाग के आला अफसरों को उम्मीद है, इस कवायद से 300 करोड़ के आसपास अतिरिक्त राशि जुटाई जा सकेगी। सरकार ने 50 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए असेसमेंट की तारीख बढ़ाने से भी इनकार कर दिया है।
दरअसल, जीएसटी लागू होने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से वाणिज्यिक कर विभाग का राजस्व प्रभावित हो रहा है। वित्त मंत्री जयंत मलैया ने बीते दिनों पेट्रोल डीजल पर सेस का बोझ लगाने के सवाल पर बताया था, वैट का निर्धारित लक्ष्य पूरा होना तो दूर सरकार को करीब दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
सरकार चिंतित है कि हाथ तंग होने से मार्च में योजनाओं के लिए राशि का इंतजाम कैसे करे? जीएसटी लागू होने से वाणिज्यिक कर वसूली के अधिकार विभागीय अफसरों के पास नहीं रहे, इसलिए आला अफसरों ने असेसमेंट तेजी से निपटाने के निर्देश दिए हैं।
रिटर्न से उम्मीद
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का सारा जोर 2015-16 के रिटर्न पर है। उपायुक्त स्तर के अधिकारी 50 करोड़ से अधिक राशि और राज्य कर अधिकारी इससे कम टर्नओवर वाले व्यापारियों का असेसमेंट कर रहे हैं। इसमें रिटर्न भरने में कमी या गड़बड़ी से कर की राशि में अंतर आता है। विभाग द्वारा इसकी वसूली के लिए पेनल्टी व 25 प्रतिशत ब्याज के साथ मांग निकाली जाती है। हालांकि यह राशि सरकार को पूरी नहीं मिलती है, अपील में जाने के लिए 25 प्रतिशत राशि जमा करवाना होती है। अफसरों को उम्मीद है, इससे ही करीब 300 करोड़ रुपए की राशि मिल सकेगी।

असेसमेंट के लिए अंतिम तिथि
50 करोड़ से अधिक टर्न ओवर वाले कारोबारियों के लिए 15 फरवरी
50 करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए 31 मार्च
राज्य में टैक्स चुकाने वाले कारोबारियों की संख्या 1.80 लाख

सरकार के जतन
जीएसटी काउंसिल हर माह निर्धारित कर 1600 करोड़ रुपए में होने वाली कमी पूरी करने के लिए क्षतिपूर्ति राशि दे रही है। वाणिज्यिक कर विभाग के साथ ही पंजीयन विभाग के आंकड़े देखने के बाद रजिस्ट्री शुल्क में नगर निगम ड्यूटी 1 प्रतिशत बढ़ाई गई है, वहीं पेट्रोल-डीजल पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त सेस लगा दिया। इसी तरह डायवर्शन टैक्स की वसूली व पंजीयन विभाग के बकाया स्टाम्प शुल्क सभी पर सख्ती की जा रही है।