
भोपाल. उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित छह धार्मिक स्थलों को भोग प्रसाद सुरक्षित स्थान के रूप में प्रमाणित किया जाएगा। इन धार्मिक स्थलों पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का अमला समय-समय पर दूध, उत्पादों सहित अन्य खाद्य सामग्री के नमूने लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच करेगा।
इसके अलावा विभाग द्वारा धार्मिक स्थलों में भंडारण के लिए अपनाई जाने बाली प्रक्रिया की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। प्रदेश में अभी महाकाल मंदिर परिसर, शारदा मंदिर मैहर और इंदौर के खजराना गणेश मंदिर को सुरक्षित भोग स्थान के रूप में प्रमाणित किया गया है। यहां खाद्य सुरक्षा के संबंध में समय-समय पर निगरानी की जाती है।
अब ओंकारेश्वर के अलाबा कुंडलगिरी जैन मंदिर दमोह, एलआइजी गुरुद्वारा इंदौर में भी यह व्यवस्था की जाएगी। यह जानकारी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नियंत्रक महालेखापरीक्षक को दी है। नियंत्रक महलेखापरीक्षक ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में बताया है कि जांच के दौरान महाकाल मंदिर परिसर प्रसाद विक्रय के चार काउंटर थे, जिनके पास विक्रय के लाइसेंस नहीं थे।
प्रसाद पैकेट में निर्माण की तिथि, उपयोग करने तक की तिथि और बैच संख्या का भी उल्लेख नहीं पाया गया था। कुछ इसी तरह की व्यवस्था शारदा मंदिर में भी पाई गई। महालेखाकार ने रिपोर्ट में यह भी बताया है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने नमूने लेने में सभी पवित्र स्थानों और धार्मिक मेलों को कवर नहीं किया है। इन स्थलों पर भी नियमित रूप से नमूने नहीं लिए गए हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित छह धार्मिक स्थलों को भोग प्रसाद सुरक्षित होने के बाद भक्तों को भगवान का प्रसाद निर्माण की तिथि, उपयोग करने तक की तिथि और बैच संख्या लिखे हुए पैकेट में प्राप्त होगा।
Published on:
03 Jan 2022 07:06 pm
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