
उपनाम के फेर में उलझी भाजपा के वरिष्ठ नेता की गुत्थी
इंदौर। उपनाम के फेर में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की कल जमकर फजीहत हो गई। प्रधानमंत्री की
अगवानी करने पहुंचे, लेकिन सूची में आए नाम और आईडी कार्ड में अंतर की वजह से उन्हें एसपीजी ने रोक दिया। नगर भाजपा अध्यक्ष ने कसरत कर सीएम हाउस तक बात की तब जाकर नेताजी को प्रवेश मिला।
महाकाल लोक के लोकार्पण में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय वायु सेना के विमान से इंदौर आए। उनकी अगवानी करने के लिए एक दर्जन से अधिक नेता देवी अहिल्या विमानतल पर 2.30 बजे पहुंच गए थे। 3 बजे के करीब सभी को प्रवेश देना शुरू किया गया। जैसे ही वरिष्ठ नेता मधु वर्मा की बारी आई, उन्होंने अपना आईडी कार्ड दिखाया, जिस पर एसपीजी के अफसरों ने अंदर जाने से रोक दिया। उनके आधार कार्ड पर मधु के बजाय महादेव वर्मा लिखा था। एसपीजी ने साफ कर दिया कि बिलकुल प्रवेश नहीं करने देंगे, जबकि सारे नेता अफसरों को समझाने में जुट गए लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।
इस पर नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने मैदान संभाला। उन्होंने अफसरों से पूछा कि कैसे प्रवेश मिल सकता है, ये बताया जाए। इस पर कहना था कि सीएम हाउस से नाम संशोधन होकर आएगा, तभी प्रवेश करने दिया जाएगा। इस पर रणदिवे ने स्थानीय पुलिस अधिकारी से लेकर सीएम हाउस तक बात की, तब तक वर्मा को बाहर ही रोक कर रखा गया था।
सारे नेता एयरपोर्ट में प्रवेश कर गए थे। जब सारी कार्रवाई पूरी हो गई तब रणदिवे ने प्रवेश किया। महादेव से मधु होने में आधा घंटे का समय लगा, जिसके बाद वर्मा को एयरपोर्ट पर प्रवेश दिया गया। जैसे ही एंट्री दी गई, वैसे ही मधु वर्मा ने राहत की सांस ली। पूर्व में भी वे प्रधानमंत्री की अगवानी कर चुके हैं लेकिन पहली बार ऐसा पेंच फंसा। रणदिवे मैदान नहीं संभालते तो शायद कल प्रवेश भी नहीं हो पाता।
फोटो चाहिए तो सभी 500-500 रुपए दो
प्रधानमंत्री की अगवानी करते हुए सभी नेताओं को फोटो खिचवाने थे। इस पर कैलाश ने कहा कि फोटोग्राफर को 500-500 रुपए सभी को देना हैं। इकट्ठा करने का जिम्मा मंत्री तुलसीराम सिलावट को दिया गया। सिलावट एक-एक के पास जाकर पैसा इकट्ठा करते रहे। आखिर में फोटोग्राफर को दिए, जबकि वह लेने से मना कर रहा था।
जिस क्रम में नाम, वैसे ही खड़े रहें
प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी करने वाले नेताओं को एसपीजी ने क्रम से खड़ा कर दिया था। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय अपनी आदत अनुसार उसमें फेरबदल करना चाहते थे। उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को सबसे पहले खड़ा करने का प्रयास किया। तर्क था कि शहर के प्रथम नागरिक हैं लेकिन एसपीजी ने उन्हें टोक दिया। साफ कर दिया कि जो सूची बनकर आई है, उस हिसाब से खड़े रहने दें। क्रम को बिलकुल ना तोड़ें। ये सुनकर विजयवर्गीय चुप हो गए। हालांकि भार्गव पहले से ही अपनी जगह पर थे।
Published on:
12 Oct 2022 11:17 am
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