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मांगा वीआरएस, कलेक्टर ने तुरंत किया स्वीकार

- स्टेनो के काम में लापरवाही पर नाराज थे कलेक्टर

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मांगा वीआरएस, कलेक्टर ने तुरंत किया स्वीकार

मांगा वीआरएस, कलेक्टर ने तुरंत किया स्वीकार

इंदौर. काम में लापरवाही की शिकायत मिलने पर कलेक्टर ने समय सीमा की बैठक में अपने पूर्व स्टेनो और अपर कलेक्टर के रीडर का वेतन रोकने का आदेश दे दिया था। कल स्टेनो नलिन पाठक ने वीआरएस का आवेदन कर दिया। ङ्क्षसह के पास जैसे ही पहुंचा, वैसे ही उन्होंने स्वीकार कर दिया। आवेदन देते समय पाठक की तबीयत भी खराब हो गई थी।


कुछ माह पहले एक महत्वपूर्ण बैठक के दस्तावेजों में लापरवाही करने पर कलेक्टर मनीष सिंह ने अपने स्टेनो रहे नलिन पाठक को हटा दिया था। सजा के बतौर उनका तबादला एडीएम पवन जैन के कार्यालय पर कर दिया गया ताकि उनकी शैली में सुधार आ जाए। सोमवार को समय सीमा की बैठक में सिंह ने एडीएम जैन से पाठक की गतिविधियों के विषय में जानकारी ली। उसके बाद नाराज सिंह ने तुरंत वेतन रोकने के निर्देश जारी कर दिए। इधर, पाठक के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही थी। उसकी रिपोर्ट आने के बाद बड़ी कार्रवाई की भी आशंका बन रही थी। परिस्थिति को देखते हुए पाठक ने कल वीआरएस का आवेदन दे दिया। जैसे ही पाठक का आवेदन जैन के पास पहुंचा, वैसे ही उन्होंने कलेक्टर के सामने आवेदन को पेश कर दिया। मनीष सिंह ने तुरंत वीआरएस के आवेदन का स्वीकार कर दिया। संभावना है कि जुलाई से सेवाएं समाप्त हो सकती हैं।


मिली-जुली प्रतिक्रिया
पाठक के वीआरएस की खबर प्रशासनिक संकुल में जंगल की आग की तरह फैली। कर्मचारियों में मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ का कहना था कि जब वे कलेक्टर के स्टेनो थे, तब साथी कर्मचारियों के साथ सख्त व्यवहार करते थे। किसी का भला नहीं किया, लेकिन कुछ कर्मचारी ङ्क्षचतित भी नजर आए। कहना था कि आज पाठक गए तो कल हमारी भी बारी आ सकती है। हालांकि इस पर कुछ कर्मचारियों का स्पष्ट मत था कि अच्छा काम करने पर शाबाशी देने में मनीष सिंह पीछे नहीं रहते हैं तो गलती होने पर डांट खाने की क्षमता भी होना चाहिए।

तहसीलदार की लापरवाही, कठघरे में कलेक्टर
-बगैर प्रस्ताव के आगे पहुंचाते रहे आवेदन
तहसीलदारों की हिमाकत तो देखिए, अपने कप्तान (कलेक्टर) से ही कलाकारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ये खुलासा उस वक्त हुआ, जब कलेक्टर के लॉगइन में रिकॉर्ड मोडिफिकेशन व अपडेशन प्रकरणों की संख्या 900 से अधिक सामने आई। अफसर भी देखकर सकते में आ गए, क्योंकि प्रदेश वालों की भी निगाह रहती है। जांच हुई तो इस जादूगरी का खुलासा हो गया।


रिकॉर्ड को कम्प्यूटराइज्ड हुए डेढ़ दशक से अधिक हो गए, लेकिन आज भी कई बार गलतियां सामने आ जाती हैं। जैसे- निजी जमीन पर सरकारी दर्ज हो जाना, खसरों का उड़ जाना, नाम में बदलाव हो जाना सहित कई प्रकार की गड़बड़ी हो जाती है। कई रिकॉर्ड में बदलाव का अधिकार कलेक्टर के पास है लेकिन प्रक्रिया वही है। वेबजीआइएस के माध्यम से तहसील में आवेदन होता है, जिसका बकायदा प्रकरण तैयार होता है। बाद में जांच करके प्रस्ताव बनाकर कलेक्टर के पास भेजा जाता है ताकि वे अपने लॉगइन आइडी से उसे सुधार सकें। इस प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए तहसीलदारों ने अपने बोर्ड के प्रकरणों का निराकरण दिखाने के चक्कर में कलेक्टर के लॉगइन में प्रकरणों को पहुंचा दिया। भेजने से पहले एक प्रस्ताव बनाकर भी भेजा जाना चाहिए था ताकि कलेक्टर उसके आधार पर निराकरण कर दें। ऐसा कुछ नहीं हुआ और प्रकरणों की संख्या धीरे-धीरे 900 से अधिक हो गई। अब जब राजस्व के कामों पर फोकस हुआ तो ये आंकड़ा अचानक सामने आ गया। जब देखा गया तो तहसीलदारों की लापरवाही सामने आ गई, जिसमें कलेक्टर का बोर्ड कठघरे में आ रहा है। इसको लेकर भू-अभिलेख विभाग प्रभारी व अपर कलेक्टर ने तुरंत सभी तहसीलदारों को पत्र जारी करके सुधार करने के निर्देश जारी किए।


ये लिखा है पत्र में
कलेक्टर के लॉगइन पर इस समय 900 से अधिक खसरा डेटा सुधार लंबित स्थिति में दिखाई दे रहे हैं, जो तहसीलदार लॉगइन से भेजे गए। इनके साथ कोई लिखित सुधार प्रस्ताव कार्यालय को नहीं भेजा गया। अनावश्यक या त्रूटिपूर्ण रूप से प्रेषित डेटा सुधार के आवेदनों को निरस्त किया जाना है व आवश्यक डेटा सुधारों को स्वीकृत किया जाना है। कलेक्टर के वेबजीआइएस लॉगइन पर अनावश्यक या त्रूटिपूर्ण रूप से प्रेषित डेटा सुधार अनुरोधों को निरस्त करने की कार्रवाई की जाना है। आवश्यक सुधारों के लिए आपके प्रेषित अनुरोधों के संबंध में कार्यालय बिंदुओं अनुसार जानकारी व फाइल प्रस्ताव तीन दिन में भेजना सुनिश्चित करें, अन्यथा संपूर्ण अनुरोधों को अवांछित मानकर निरस्त कर दिया जाएगा। इस सबंध में संपूर्ण जवाबदारी आपकी होगी। पत्र के बाद में तहसीलदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। माना जा रहा है कि इस लापरवाही के चलते कुछ तहसीलदारों की क्लास भी लग सकती है।