19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मराठी समाज ठगाया… सत्ता से अब बहुत दूर

पांच साल पहले तक इंदौर की राजनीति में होता था दबदबा, सुमित्रा महाजन और कृष्णमुरारी मोघे के कमजोर पड़ते ही समाज को भारी नुकसान, एमआईसी में समाज से एक भी नहीं

2 min read
Google source verification
मराठी समाज ठगाया... सत्ता से अब बहुत दूर

मराठी समाज ठगाया... सत्ता से अब बहुत दूर

इंदौऱ। तीन दशक से इंदौर की सत्ता पर एकछत्र कŽब्जा रखने वाला मराठी समाज अब ठगा सा महसूस कर रहा है। पहले सांसद से लेकर एमआईसी तक में समाज का प्रतिनिधित्व होता था, लेकिन सत्ता से उसे पूरी तरह साफ कर दिया गया। सच्चाई तो ये है कि ताई के कमजोर होते ही समाज की पकड़ भी हाथ से फिसल गई।

वैसे तो भाजपा का संगठन सोशल इंजीनियरिंग का खासा ध्यान रखता है, लेकिन इंदौर में सारे समीकरण गड़बड़ाने लग गए हैं। तीन दशक तक इंदौर की सत्ता मराठी समाज के हाथ में थी पर अब उसे तेजी से दरकिनार किया जा रहा है। एमआईसी में भी ठीक ऐसा ही हुआ। मराठी समाज से एक भी सदस्य को नहीं लिया गया, जबकि पिछले बार सुधीर देडग़े थे तो आधा दर्जन से ज्यादा पार्षद समाज के चुने गए थे।

इस बार पार्टी ने टिकट भी न के बराबर दिए थे। वह तो आखिरी समय पर पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन अड़ गईं, जिसके चलते सुरेश टाकलकर और प्रशांत बड़वे को टिकट दे दिया गया। नगर निगम में दिखाने के लिए बड़वे को अपील समिति का अध्यक्ष बना दिया गया, जिसका कोई महत्व नहीं है। गौरतलब है कि तीन साल पहले तक सुमित्रा महाजन लोकसभा में इंदौर का प्रतिनिधित्व करती थीं। अंतिम कार्यकाल में तो देश के सबसे बड़े सदन की सबसे ऊंची आसंदी पर भी काबिज रहीं।

उनके अलावा कृष्णमुरारी मोघे का भी दबदबा कायम था, जिनकी बात को इंदौर तो ठीक मध्यप्रदेश में भी गंभीरता से लिया जाता था, लेकिन अब दोनों ही नेताओं को पार्टी ने हासिए पर डाल दिया है। दोनों ही नेताओं की वजह से मराठी समाज को सम्मान मिलता रहा, लेकिन अब सत्ता हाथ से फिसल गई। इन दोनों के पहले नारायण राव धर्म और राजेंद्र धारकर की एकतरफा चलती थी, जिन्होंने इंदौर में भाजपा को खड़ी करने में अपना जीवन खपा दिया। इस बार तो धर्म की बेटी व दो बार की पार्षद विनिता का भी टिकट काट दिया गया।

समाज व शहर की राजनीति
- सांसद शंकर लालवानी - सिंधी
- महापौर पुष्यमित्र भार्गव - ब्राह्मण
- सभापति मुन्नालाय यादव - ओबीसी
- मंत्री उषा ठाकुर - राजपूत
- मंत्री तुलसी सिलावट - खटीक
- आईडीए अध्यक्ष जयपालसिंह चावड़ा - राजपूत
- विधायक रमेश मेंदोला - ब्राह्मण
- विधायक आकाश विजयवर्गीय -वैश्य
- विधायक मालिनी गौड़ - राजपूत (सोनी)
- विधायक महेंद्र हार्डिया - मुराई
- एमआईसी - मराठी समाज से एक भी नहीं।

ब्राह्मणों का बोलबाला
इंदौर की राजनीति में देखा जाए तो ब्राह्मण समाज का बोलबाला हो गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक रमेश मेंदोला समाज से आते हैं। उनके अलावा अब अश्विनी शु€क्ल, मनीष शर्मा और बबलू शर्मा एमआईसी सदस्य हो गए हैं, जो कि ब्राह्मण ही हैं। देखा जाए तो निगम में विप्रजन का एकतरफा कब्जा हो गया है।