
मारवाड़ी समाज की महिलाओं ने 8 बच्चों को लिया गोद
इंदौर। महिलाएं किसी भी तरह से अब पीछे नहीं रही हैं यह बात हर बार वे साबित भी कर देती हैं जीं हां ऐसी एक पहल की है अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की महिलाओं ने। सौ महिलाओं के इस ग्रुप ने दस साल से ८ बच्चों को गोद ले रखा हैं और पढ़ाई से लेकर हर तरह से उन बच्चों की मदद कर रही हैं। इतना ही नहीं हर साल वे वन बंधु परिषद के स्कूल को गोद भी लेती हैं और अब तक पांच स्कूलों को गोद ले चुकी हैं।
1983 से संचालित अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की नींव बिहार में रहने वाली सुशीला मोहनका ने रखी था हालांकि अब वे अमेरिका में है लेकिन हर साल राष्ट्रीय अधिवेशन में वे शामिल होती है। मारवाड़ी महिलाओं को जागृत करने के लिए उन्होंने बारह प्रांतों में शाखाएं शुरू की जहां अब तक पांचसौ शाखाएं चल रही हैं।
मप्र में ही 35 शाखाएं काम कर रही है। एक वन बंधु परिषद (एकल विद्यालय) के स्कूल का खर्च एक साल में करीब 20 हजार रुपए आता हैं जो महिलाओं द्वारा ही इक_े किए जाते हैं। यह आदिवासी स्कूल होते हैं जहां एक गुरु होते हैं और बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक ज्ञान, गीता व संस्कारों से भी अवगत कराते हैं।
आगे बढऩे के देख रहे सपने
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की प्रांतीय अध्यक्ष इंदू गर्ग ने बताया पर्यावरण, नेत्रदान, बाल विकास, महिला सशिक्तकरण, स्वास्थ्य एवं सेवा और प्रौढ़ शिक्षा के लिए भी सम्मेलन काम कर रहा है। कई जरुरतमंद बच्चों को पढ़ाना और उन्हें जरुरत का सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ जिला जेल के बच्चों की भी समय-समय पर मदद की जाती है। अनाथाश्रमों में अन्नदान भी किया जाता है। दस साल से गोद लिए 8 बच्चों से कोई 11 वीं तो कोई 6वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। यह वे बच्चे हैं जो आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते शिक्षित नहीं हो पा रहे थें लेकिन अब महिलाओं के नेक कदम से यह बच्चे न सिर्फ पढ़ पा रहे हैं बल्कि जीवन में आगे बढऩे के सपने भी देख रहे हैं।
Published on:
21 Jun 2018 12:52 pm
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