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नृत्य-संगीत के साथ बयां मराठी फिल्मों का सफर,इस नाटक में है कुछ बात

डीएवीवी ऑडिटोरियम में सानंद न्यास के दर्शकों के लिए कार्यक्रम ‘प्रभात ते सैराट’ का आयोजन

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इंदौर

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Amit Mandloi

Jun 10, 2018

drama in indore

नृत्य-संगीत के साथ बयां मराठी फिल्मों का सफर,इस नाटक में है कुछ बात

इंदौर. लगभग 90 बरस पहले जब मूक फिल्मों का दौर खत्म हो रहा था और फिल्में बोलने लगी थीं तब कोल्हापुर में वी. शांताराम ने प्रभात फिल्म कंपनी की स्थापना की थी। वी शांतरामा ने फिल्मों के जरिए सामाजिक समस्याएं उठाई थीं तब से लेकर अब एक लव स्टोरी सैराट ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रखी है। मराठी फिल्मों ने एक लंबा सफर तय किया है। उसी सफर पर केंद्रित था कार्यक्रम प्रभात ते सैराट। सानंद न्यास के दर्शकों के लिए ये कार्यक्रम शनिवार की शाम यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में पेश किया गया। मिलिंद ओक की परिकल्पना और निर्देशन में तैयार कार्यक्रम में पुरानी फिल्मों के गीतों की लाइव प्रस्तुति ने उम्रदराज दर्शकों की यादें ताजा कर दीं।

प्रभात ते सैराट के मुख्य निवेदक यानी एंकर राहुल सोलापुरकर ने वाकपटुता ही नहीं बल्कि अपनी वेशभूषा से भी प्रभावित किया। वह जिस दौर की बात करते उसी तरह के गेटअप में मंच पर आते। उन्होंने बताया कि प्रभात कंपनी के दौर की फिल्मों का संगीत लोकसंगीत से प्रभावित था तो बाद में यानी 50 के दशक तक उस पर शास्त्रीय संगीत का प्रभाव रहा और फिर पाश्चात्य संगीत का असर नजर आया। स्क्रीन पर 70 बरस पुराने गीत नाच रे मोरा.... को भी दिखाया और नृत्य किया गया।

मधुर भावगीत और तेज लावणी
मराठी संगीत में भावगीतों का बड़ा महत्व है। पुरानी फिल्में भावगीतों के बिना पूरी नहीं होती थीं। इन फिल्मों के भावगीतों को मंच पर कलाकारों ने गाया और तेज गति के संगीत वाले लावणी गीत भी गाए। गायक चैतन्य कुलकर्णी, जितेंद्र अभ्यंकर, स्वरदा गोडबोले और देविका दामले ने पुराने गीतों को पेश किया। ऋतुजा इंगले, एेश्वर्या काले, सुमित गजमल, अभिषेक हावरागी, उत्कर्षा रोकड़े, उपेंद्र इंगलीकर और सागर खांबे ने रंगारंग नृत्यों की प्रस्तुति दी।

नापसंद दृश्य पर बजी तालियां
राहुल सोलापुरकर ने एक किस्सा जीडी माडगुलकर का सुनाया। माडगुलकर ने मराठी फिल्मों के स्क्रीन प्ले और गीत लिखे हैं। पद्मश्री से सम्मानित माडगुलकर ने एक फिल्म लिखी थी सांग्त्ये एका। उन्हें स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई और उन्होंने उस पर फिल्म बनाने से मना किया पर निर्माता नहीं माने। फिल्म बनी और सुपरहिट रही। माडगुलकर खुद फिल्म देखने गए तो उन्होंने देखा कि जो दृश्य उन्हें एकदम नापसंद थे, उन्हीं पर दर्शक ताली बजा रहे हैं।