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मेडिकल स्टूडेंट्स को बड़ा झटका- एमजीएम मेडिकल कॉलेज से कम हुई 35 पीजी सीट

एमसीआइ को समय पर आवेदन नहीं करने से बनी स्थिति

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इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के हाथ से क्लीनिकल विभागों की ३५ पीजी सीट नए सत्र में मिलने की संभावना जिम्मेदारों की लापरवाही से खत्म हो गई है। पत्रिका ने ८ अप्रैल के अंक में ‘एमजीएम की लापरवाही: ३५ पीजी सीट बढऩे पर खतरा’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इसका खुलासा किया था। इसके बावजूद प्रबंधन ने अब तक किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की है।

गौरतलब है कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हाल ही में 12 प्रोफेसर व 33 एसोसिएट प्रोफेसर की सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से करने के बाद कॉलेज को पीजी की 35 सीटें बढऩे की उम्मीद थीं। फिलहाल कॉलेज में 58 पीजी डिग्री और 13 पीजी डिप्लोमा सीटें हैं। वर्ष 2018-19 के लिए नई सीटों का प्रस्ताव मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) को भेजा जाना था। ऑनलाइन आवेदन के बाद फिजिकल आवेदन की एमसीआई के दिल्ली कार्यालय पहुंचाने की तारीख ७ अप्रैल तय थी। स्थापना शाखा ने तय दिनांक तक आवेदन नहीं भेजा। ८ अप्रैल को कर्मचारी को दिल्ली पहुंचाया गया, लेकिन एमसीआइ ने एक्सटेंशन के बाद ही अंतिम तारीख जारी करने की बात कहकर आवेदन लेने से इनकार कर दिया। इस मामले में स्थापना शाखा प्रभारी के साथ मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारियों की सीधी लापरवाही सामने आई, इसके बाद भी प्रबंधन उन पर कार्रवाई करने की बजाय मामले को रफा-दफा करने में जुटा है।

ये हैं लापरवाही के जिम्मेदार
सीटों की प्रक्रिया की सारी जिम्मेदारी स्थापना शाखा इंचार्ज डॉ. श्याम बंसल की थी। विभागों के कार्य की निगरानी का सीधा दायित्व डीन डॉ. शरद थोरा का था। इस मामले में डॉ. बंसल से पत्रिका ने संपर्क किया तो पहले उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही। इसके बाद वह जवाब देने से बचते रहे।

अब नॉन क्लीनिकल का बहाना
12 विभागों की क्लीनिकल सीट बढऩे की उम्मीद खत्म होने के बाद अब कॉलेज प्रबंधन अपनी गलती पर पर्दा डालने के लिए फिजियोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन जैसी पांच नॉन क्लीनिकल विभागों की सीटों के लिए आवेदन की बात कह रहा है। जबकि नॉन क्लीनिकल सीटें हर साल खाली रह जाती हैं। क्लीनिकल विभागों की सीट के लिए छात्रों को लाखों रुपए निजी कॉलेजों की फीस भरना पड़ती है।

एमसीआइ से एक्सटेंशन मांगा गया था। एक्सटेंशन नहीं मिलने पर अब नॉन क्लीनिकल सीटों के लिए आवेदन प्रक्रिया की जाएगी। लापरवाही का सवाल ही नहीं है, क्योंकि १५-२० दिन पहले ही प्रोफेसर्स की भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई है। हमारी ओर से ही इसी सत्र में आवेदन की कोशिश की जा रही थी।
डॉ. शरद थोरा, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज