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‘गोल्ड मेडल की जगह डॉक्टर का व्यक्तित्व चमकना चाहिए’

एमजीएम मेडिकल कॉलेज में गोल्ड मेडल डिस्ट्रिब्यूशन सेरेमनी, १३३ स्टूडेंट्स को मिले २६८ मेडल

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इंदौर . गुजराती कॉलेज में मुझे गोल्ड मेडल मिला था तो बड़ी खुशी हुई थी, बाद में पता चला कि गोल्ड मेडल के नाम पर सिल्वर मेडल रख दिए गए थे। इसीलिए स्टूडेंट्स से ये कहना चाहता हूं कि गोल्ड और सिल्वर जो भी मिला हो, लेकिन महत्वपूर्ण है कि मेहनत का फल मिलने की भावना। गोल्ड मेडल की चमक से ज्यादा जरूरी है व्यक्तित्व की चमक। यह बात अतिरिक्त मुख्य सचिव आरएस जुलानिया ने कही। वह मुख्य अतिथि के रूप में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई गोल्ड मेडल डिस्ट्रिब्यूशन सेरेमनी में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीवन में दो बातें जरूर ध्यान रखें। पहली ये कि आपके एकेडमिक स्कोर आपको अच्छा इंसान नहीं बनाते और न जिंदगी में इस आधार पर कोई आपको जज करता है। दूसरी यह कि मैंने देखा कि असल जिंदगी में टॉपर्स ज्यादा सफल नहीं होते हैं। इसीलिए अपने एकेडमिक्स पर खुश जरूर हो, लेकिन कोशिश करें कि आप बेहतर इंसान बन पाएं। कार्यक्रम में 26 पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों सहित 133 विद्यार्थियों को 268 मेडल्स दिए गए। कॉलेज का सबसे प्रतिष्ठित एमजीएम ब्लू अवॉर्ड 2011 की डॉ. श्रीनी पारीख और 2012 बैच की डॉ. आयुषी पाराशर, २००७, 2008, 2009 और 2010 बैच के क्रमश: डॉ. श्रद्धा सराफ, डॉ. निमिषा शर्मा, डॉ. अंशुल अग्रवाल और डॉ. अंबर मित्तल को दिया गया। ये अवॉर्ड एकेडमिक परफॉर्मेंस के साथ कल्चरल एक्टिविटीज में बेहतर पार्टिसिपेशन के लिए दिया जाता है। कार्यक्रम में डीन डॉ. शरद थोरा, स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी के उपाध्यक्ष मनोहर भंडारी भी उपस्थित थे।
इन्हे मिले सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल
डॉ. प्रसून पी. - ०8, डॉ. अंबर मित्तल - ०8, डॉ. सपना सबनानी - ०8, डॉ. कृति जैन - ०8, डॉ. अपूर्वा सुरान - ०६, डॉ. पलक बाहेती- ०६, डॉ. भाग्यश्री राठौर - ०६, डॉ. हिमांशी जैन - ०६, डॉ. रुद्री अग्रवाल - ०६, डॉ. आकांक्षा पटेल- - ०६, डॉ. पूर्णिमा शर्मा - ०६, डॉ. श्रीनी पारीख - ०६

पॉपुलेशन ज्यादा होने से मिलता है एक्सपोजर
डॉ. आयुषी पाराशर
आयुषी ने एमजीएम ब्लू अवॉर्ड में होने वाले निबंध लेखन प्रतियोगिता में एमबीबीएस कॅरिकुलम मेरिट्स एंड डी मेरिट्स सब्जेक्ट में लिखा था कि हमारे यहां पॉपुलेशन ज्यादा होने से एक्सपोजर ज्यादा अच्छा मिलता है, लेकिन हमें वर्टिकल इंटीग्रेटेड सिस्टम डवलप करने की जरूरत है, जिससे स्टूडेंट्स को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि काफी समय तक कल्चरल एक्टिविटीज से जुड़ी रही जिसका फायदा मिला।

१६ से १८ घंटे तक करता था पढ़ाई
डॉ. अंशुल अग्रवाल

२००९ बैच के डॉ. अंशुल अग्रवाल बताते हैं कि आज गोल्ड मेडल्स और अवॉर्ड मिल रहे है, ये काफी खुश करने वाला है। मुझे याद है कि इसे पाने के लिए मैंने लगातार १६ से १८ घंटे तक पढ़ाई की है। मैं एकेडमिक्स में भी एक्टिवली पार्टिसिपेट करता था। मैंने कॉलेज की टीम को टेबल टेनिस में देश को रिप्रजेंट किया।

लाइफ को करता हूं एंजॉय
डॉ. अंबर मित्तल
जबलपुर से एमडी मेडिसन कर रहे २०१० बैच के डॉ. अंबर मित्तल ने बताया कि मेरा पढ़ाई पर पूरा फोकस रहता था, लेकिन साथ ही मैं कॉलेज एक्टिविटीज में भी पार्टिसिपेशन देता था। मैं काफी टाइम तक स्टूडेंट यूनियन से भी जुड़ा रहा, जिसका मुझे फायदा मिला। मेरा मानना है कि पढ़ाई के साथ लाइफ को भी एन्जॉय करना चाहिए।