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भारत ने मिलेट ( मोटा अनाज ) के लिए “मीरा” की वीणा से छेडा राग, दुनिया में ग्रीन एग्रीकल्चर के लिए क्लाइमेंट फाइनेंस

जी-20 कृषि समूह ने जलवायु परिवर्तन और जीरो हंगर -2030 के लिए बनाया इंदौर रोडमेपजी-20 कृषि समूह की बैठक में आए अलग-अलग प्रस्ताव

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इंदौर

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Sandeep Pare

Feb 17, 2023

भारत ने मिलेट ( मोटा अनाज ) के लिए

भारत ने मिलेट ( मोटा अनाज ) के लिए

इंदौर। भारत के आग्रह पर यह साल अंतर्राष्ट्रीय मिलेट ( मोटा अनाज ) वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जी-20 कृषि प्रतिनिधि समूह की बैठक में सदस्य देशों ने कृषि व अनाज उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए नवाचार के प्रस्ताव दिए। भारत की ओर से डिजिटलाइजेशन के प्रयासों के साथ ही मिलेट इंटरनेशनल इनिशिएटिव फार रिसर्च एंड अवेयरनेस ( एमआईआईआरए ) यानी "मीरा" की वीणा का राग छेडा। वहीं विकसित देशों ने क्लाइमेंट फाइनेंस के लिए ग्रीन एग्रीकल्चर के नवाचार को रखा।
बैठक में कृषि मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव शुभा ठाकुर ने योजना का प्रस्तुतीकरण दिया। मिलेटस एक पोषक तत्वों से भरपूर अनाज है। इसका उपयोग उत्पादन के अनुपात में कम हो रहा है। इसे प्रोत्साहित करने के लिए मीरा अभियान शुरू किया जा रहा है। जिससे दुनियाभर में मिलेटस रिसर्च और संस्थागत कार्य से जोड़ सकें। इसकी कल्पना फ्रांस के व्हीट इनिशिएटिव की तर्ज पर की गई है। 2011 में गेंहू उत्पादन बढ़ाने के लिए यह काम किया गया था। इसमें सदस्य देश, गैर सदस्य देश, शोध संस्थान, फार्मर संगठन जुड़ सकते हैं। इसके लिए मेक से सहमति भी बन गई है। सदस्य देशों का रूख मिलेट्स के उत्पादों की बिक्री पर ज्यादा रहा। इसके लिए उत्पादन व बिक्री में समन्वयन बनाने की बात कही गई।

इस तरह रहेगा स्ट्रक्चर
- प्रस्तावित कार्यक्रम का एक ही उद्ेश्य है, मिलेटस के लिए शोध, उत्पादन और जागरूकता के लिए काम करना। जिससे इसे गेंहू की तरह ज्यादा से ज्यादा उत्पादित किया जा सकें।
- इसके लिए एक वेब प्लेट फार्म तैयार होगा। जिससे सभी संस्थानों, मिलेट्स उत्पादन और प्रोसेसिंग से जुड़े किसान व उद्यमियों को लाएंगे।
- इसके उत्पादन में आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए विशेषज्ञों का समूह तैयार करना।
- अतंर्राष्ट्रीय स्तर की कांफ्रेंस व इनोवेशन को पुरस्कृत करना और प्रचार प्रसार नेटवर्क तैयार करेंगे।

ग्रीन एग्रीकल्चर को प्रोत्साहन
पर्यावरण और जलवायु दोनों कृषि को प्रभावित करते हैं। बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की गई। पर्यावरणीय परििस्थतियों पर शोध कर रहे हैं। जलवायु के अनुकूल फसलों की किस्में बना रहे हैं। क्लाइमेंट फाइनेंस पर भी विचार आए। शीर्ष बैंकों एडीबी और वर्ल्ड बैंक ने ग्रीन एग्रीकल्चर के लिए फाइनेंस आदि की भी बात कही। कृषि को कार्बन क्रेडिट से भी जोड़ रहे हैं।

दुग्ध संघ को अमूल से करेंगे संगठित
सांसद शंकर लालवानी ने बताया, यह बैठक हमारे लिए अच्छा अवसर है। बैठक में सहकारिता से कृषि को बढाने के प्रयासों पर भी चर्चा की गई। बताया गया कृषि से जुडी अन्य गतिविधियों को भी जोड़ना होगा। डेयरी एक बड़ा सेक्टर है। गुजरात में अमूल एक संगठित सहकारी संघ है। इसके माध्यम से दुग्ध संघ को और बेहतर बनाने का कार्य करेंगे। हमारे यहां कृषि महाविद्यालय में ज्वार रिसर्च सेंटर है। यहां अन्य मिलेट्स के रिसर्च की संभावनाओं को देखते हुए इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मिलेटस रिसर्च केंद्र से जोड़ेगे। उद्यानिकी के लिए पैरिशिएबल कार्गों जल्द शुरू हो जाएगा। जिससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा।