
राज्य शालेय खेल स्पर्धा : दो दिन से नहाने को तरस रहीं प्रदेशभर की खिलाड़ी, ऐसी जगह ठहराया जहां बाथरूम ही नहीं
इंदौर. शिक्षा विभाग की राज्य शालेय खेल स्पर्धा में आए खिलाड़ी दो दिन से नहाने को भी तरस रहे हैं। बच्चों को सरकारी स्कूलों में ठहराया है। एक स्कूल में 200 से ज्यादा बच्चे ठहरे हैं। उनके हिसाब से यहां न तो शौचालय है न ही बाथरूम।
एमआइजी स्थित स्कूल में स्पर्धाएं हो रही हैं और बच्चों को बड़ा गणपति स्थित शारदा कन्या स्कूल, छीपा बाखल माध्यमिक स्कूल और अन्य जगह पर रोका है। शारदा कन्या स्कूल में 250 से ज्यादा छात्राओं को रखा है। गुरुवार रात पत्रिका टीम ने यहां का जायजा लिया तो छात्राओं ने बेहद गंदा सूरत-ए-हाल सामने रखा। 250 छात्राओं के लिए महज दो बड़े शौचालय हैं, वो भी इतने गंदे कि दूर से ही बदबू आ रही है। इन्हीं शौचालयों के आगे के हिस्से में एक ड्रम रखकर नहाने की व्यवस्था की गई है। बच्चियों के लिए बिस्तर भी गुरुवार देर रात पहुंचे। पीने के पानी के लिए 10-10 लीटर की वाटर केन हैं। इससे छात्राएं पीने के पानी के लिए भी तरस रही हैं। मच्छरों से भी परेशान हैं। छीपा बाखल स्कूल में भी छह संभाग के 200 से ज्यादा छात्रों को रोका गया है। इसके लिए महज तीन टॉयलेट हैं। तीनों बेहद बदबूदार हैं, छात्र उनमें जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। बदबूदार शौचालय में ही नहाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन इतना पानी भी नहीं है कि छात्र नहा सकें। इस कारण छात्र दो दिन से नहाए भी नहीं।
कक्षाएं भी बंद
खिलाडिय़ों को सरकारी स्कूलों में रोके जाने से सभी कक्षाएं भरी हुई हैं। इसके कारण स्कूल के नियमित छात्रों के लिए 13 अगस्त प्रतियोगिता चलने तक के लिए कक्षाएं बंद कर दी गई हैं।
डराता रहा चौकीदार
शारदा कन्या स्कूल में पत्रिका टीम को छात्राओं ने दिक्कत बताई तो यहां व्यवस्था देख रहा कर्मचारी उमाशंकर पाल उन्हें डराने लगा। हालांकि बच्चियों ने अव्यवस्था की पूरी हालत बयां कर दी।
चलित शौचालय खड़े कर दिए
छीपा बाखल स्कूल में पिछले हिस्से में दो चलित शौचालय तो खड़े कर दिए गए, लेकिन बेहद गंदे होने से छात्र उनमें जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
किसी को पनीर तो किसी को दाल-रोटी
छीपा बाखल स्कूल में एक ही परिसर में तीन मेस चल रही हैं। उज्जैन, रीवा और भोपाल संभाग के छात्रों के लिए अलग मेस। एक संभाग के बच्चों को जहां पनीर मिल रहा है, वहीं दूसरे संभाग के बच्चों को दाल-रोटी से गुजारा करना पड़ रहा है।
Updated on:
10 Aug 2018 01:22 pm
Published on:
10 Aug 2018 08:18 am
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