
मच्छर मारने के नाम पर पैसों का उड़ रहा धुंआ
इंदौर.
शहर में डेंगू, मलेरिया सहित अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए नगर निगम हर दो साल बाद मशीनें खरीदता है, लेकिन पुरानी मशीनों की स्थिति नहीं देखी जाती है। निगम ने एक बार फिर से 19 मशीनें खरीदी हैं। ये मशीनें सभी जोन को वितरित करते हुए वहां पर इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।
नगर निगम के पास शहर में मच्छरों को मारने के लिए 6 से ज्यादा फागिंग मशीनें, १2 से ज्यादा वाटर फागिंग मशीनें (कंधे पर लेकर धुआं उड़ाने वाली) और 60 से ज्यादा हैंडसीकर (कीटनाशक छिडक़ने वाले पंप) हैं। जो फागर मशीनें हैं उनमें से केवल 4 फागर मशीनें ही नगर निगम के अफसर काम में ले रहे हैं। इसमें से भी दो मशीनें ही शहर में मच्छर उड़ाने के काम आ रही हैं। बाकी मशीनों के बारे में बताया जा रहा है कि वो मशीनें खराब हो रही हैं और पूरी तरह से काम नहीं कर पा रही हैं। निगमायुक्त आशीष सिंह ने शहर में मच्छरों की स्थिति को लेकर हुई बैठक में भी अफसरों से इसके बारे में पूछताछ की थी, अफसरों ने उन्हें भी यही जवाब दिया था। उस समय पुरानी मशीनों के बारे में नहीं बताया गया था। जिसके बाद निगमायुक्त ने मशीनों की कमी को देखते हुए नई मशीनों को खरीदने के लिए कहा था। लगभग 60 हजार रुपए की एक मशीन की कीमत के हिसाब से निगम ने लगभग १२ लाख रुपए में ये मशीनें खरीदी हैं।
गायब मशीनों की कोई जानकारी नहीं
पहली बार फागर मशीनें 200६-07 में नगर निगम ने खरीदी थी। ये मशीनें कंधे पर लेकर कीटनाशक का धुंआ उड़ाने के लिए थी। लगभग 1 लाख की कीमत में ये 2 मशीनें बतौर ट्रायल ली गई थीं। उसके बाद नगर निगम ने चार ओर मशीनें खरीदी थी। कृष्णमुरारी मोघे के महापौर रहते दो बड़ी फाङ्क्षगग मशीनें खरीदी गई थी। लगभग ढाई लाख रुपए कीमत की ये मशीनें गाड़ी पर रखकर धुआं उड़ाने के लिए खरीदी थी। बीते साल भी एक फागिंग मशीन को एक गाड़ी पर रखकर नगर निगम ने शहर में धुआं उड़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। इस तरह आधा दर्जन के लगभग मशीनें निगम के पास थी। इसी तरह से 10 से ज्यादा वाटर फागिंग मशीनें भी थी। जिनसे कीटनाशक और मच्छरों को मारने के लिए दवाओं का छिडक़ाव किया जाता है। इसके अलावा हर वार्ड स्तर पर एक सीकर भी निगम ने दे रखा है।
मेड इन ब्रिटेन मशीन भी गायब
नगर निगम के पास एक बड़ी मशीन बरसों तक मौजूद थी। ये मशीन मेड इन ब्रिटेन थी। 2004 के सिंहस्थ में इसी मशीन ने पूरे सिंहस्थ क्षेत्र में मच्छरों पर काबू पाने के लिए दवाओं का छिडक़ाव किया था। उसके बाद कई सालों तक ये मशीन नगर निगम ने इस्तेमाल की थी। लेकिन जब छोटी फागिंग मशीनें खरीदी गई तो 2008 के बाद इसका इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया गया था। उसके बाद ये मशीन कहां गई इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।
निगम ने भी बनाई थी मशीन
शहर में मच्छरों पर काबू पाने के लिए नगर निगम वर्कशॉप विभाग ने भी एक मशीन तैयार की थी। ये मशीन एक मैजिक गाड़ी पर पूरे कवर हिस्से में थी। इस मशीन को निगम स्वास्थ्य विभाग ने असुरक्षित बताते हुए इसका इस्तेमाल करने से इंकार कर दिया था। जिसके बाद ये मशीन निगम वर्कशॉप में ही पड़ी रही।
ज्यादा से ज्यादा 3 हजार में सुधरती है मशीनें
नगर निगम के पास जो फागिंग मशीनें थी उनको सुधारने पर भी ज्यादा खर्चा नहीं होता था। इन मशीनों मे ज्यादा से ज्यादा पंप और मोटर के साथ हैंडल में खराबी आती है। इसे सुधरवाने पर नगर निगम को ज्यादा से ज्याद तीन हजार रुपए तक का खर्चा आता था।
प्रभारी ने पूछा तो बताया खराब होती रहती हैं
नई मशीनें खरीदने के पहले निगम के स्वास्थ्य विभाग प्रभारी संतोष गौर ने नगर निगम के अफसरों से पुरानी मशीनों के बारे में पूछा था। उस समय उन्हें बताया गया था कि मशीनें खराब होती रहती हैं। इसके चलते नई मशीनें खरीदी हैं।
- निगम के पास पहले से भी फॉगिंग मशीनें थीं ये बात सही है। वे अभी कहां हैं मुझे ज्यादा जानकारी नहीं है। पुरानी मशीनों को भी सही करवाकर इस्तेमाल में लाएंगे। मैं उनकी पूरी जानकारी जुटाऊंगा।
- संतोष गौर, प्रभारी स्वास्थ्य विभाग
Published on:
26 Jul 2018 11:23 pm
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