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तीस किलो वजन के साथ फतह किया किलिमंजारो

अफ्रीका के पहाड़ पर चढऩे वाले मधुसुदन पाटीदार ने शेयर किए अनुभव

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Mount Kiliminjaro

Mount Kiliminjaro

इंदौर. जिंदगी जितनी कठिन हो उतना ही मजा आता है। आसान रास्ते बड़ी सफलता की तरफ नहीं जाते। इसीलिए मैं हमेशा सबसे कठिन रास्ता चुनता हूं। किलिमंजारों पर चढ़ाई करने के छह रास्ते थे। वेस्टर्न ब्रीच के रास्ते को अमरीका से आई रिसर्च टीम ने भी सबसे खतरनाक बताया था। मौत का खतरा बहुत होता है वहां। मैंने किलिमंजारों पर चढऩे के लिए इसी रास्ते को चुना। जब ये डिसाइड किया तो वहां के ऑफिसर्स ने मुझसे साइन करवाए कि मैं अगर जिंदा लौटकर नही आता हूं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी ही होगी। अफ्रीका के सबसे खतरनाक किलिमंजारों पर फतह हासिल करने के अनुभव मधुसुदन पाटीदार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविवार को शेयर किए। उन्होंने १५ दिसंबर को चढ़ाई शुरू की और ७० घंटे में चढ़ाई कर किलिमंजारो पर पहुंचे और २२ घंटे वहां टैंट लगाकर बिताएं। सबसे कठिन रास्ते से होते हुए कम समय में २१ साल की उम्र में किलिमंजारों पर पहुंचने वाले वे पहले भारतीय है।

गैंस सिलेंडर हुआ बंद
मधुसुदन ने बताया कि मेरे पास खाने और दूसरी जरूरत का तीस किलो सामान था। इसे लेकर चढ़ाई की। मैं फ्रूट्स, नूडल्स जैसी चीजें लेकर चला था। जब वहां पहुंचा तो गैस सिलेंडर काम नहीं कर रहा था और खाने के लिए सिर्फ एक ऑरेंज बचा था। इतनी ठंड थी कि मैं उसे छील भी नहीं पाया। रास्ते में मेरे सपोर्टर को टाइफाइड हो गया तो उसे नीचे भेज कर रेस्क यू किया। गाइड और कुक डरे हुए थे। मेरा गाइड भी इतनी ऊंचाई पर कभी नहीं रुका था। २२ घंटे वहां बिताकर बहुत खुशी महसूस हुई। एवरेस्ट पर जो परेशानियां देखी तो ये चुनौती इतनी कठिन नहीं लगी।

बचपन से पसंद हैं पहाड़
मधुसुदन कहते हैं कि मुझे बचपन से पहाड़ और जंगल पसंद थे। मुझे वो गलियों पसंद ही नहीं थी जिससे सब निकलते थे। मैं हमेशा नए रास्तों की तलाश में रहता था और इसीलिए मैंने ये टफ रास्ता चुना। मेरी इच्छा है कि मैं सेवन समिट चैलेंज का हिस्सा बनूं।