
मोहित पांचाल. वैसे तो 3 दिसंबर को सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा, लेकिन मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर कुछ ऐसे भी नेता हैं, जिनका राजनीतिक भविष्य भी तय होगा। कई प्रत्याशियों के लिए चुनाव हारना राजनीतिक जग हारने जैसा होगा। एक तरह से ये उनका आखिरी चुनाव भी हो सकता है। पांच साल बाद उम्र किसी के आड़े आएगी तो कुछ के लगातार हारने पर पार्टी द्वारा किनारा करने का डर रहेगा। हालांकि राजनीतिक समीकरण कब बदलें, कहा नहीं जा सकता। लेकिन, हारने वाले कुछ नेताओं के लिए परिस्थितियां पक्ष में नहीं हैं।
कांग्रेस प्रत्याशियों के सामने संकट
- उत्तम पाल सिंह: मंधाता से 2020 का उपचुनाव हार चुके हैं।
- कुंदन मालवीय: खंडवा से 2018 में पराजय।
- चंद्रभागा किराड़े: हारीं तो उम्र अधिक होने से भविष्य में संकट।
- विक्रांत भूरिया: झाबुआ में 2018 का चुनाव हारे।
- प्रभा बालमुकुंद गौतम: धार से 2018 का चुनाव हारीं। पति बालमुकुंद गौतम भी दो बार चुनाव हार चुके हैं।
- भंवरसिंह शेखावत: भाजपा की राजनीति का बड़ा नाम होने के बावजूद 2018 में हारे। इस बार कांग्रेस से चुनाव लड़ा।
- सत्यनारायण पटेल: इंदौर-5 से 2018 में चुनाव हारे। इससे पहले देपालपुर और सांसद के दो चुनाव की हार दर्ज है।
- रामवीरसिंह सिकरवार: शुजालपुर से 2018 में हारे।
- राजीवसिंह बघेल: हाटपीपल्या से 2020 में उपचुनाव में पराजय।
- राकेश पाटीदार: सुवासरा से 2020 में उपचुनाव में हार।
- सुभाष सजोतिया: गरोठ से चुनाव लड़ रहे हैं, 2018 में हारे थे।
- नरेंद्र नहाटा: मनासा से चुनाव लड़ रहे नहाटा 2018 में हार गए थे।
- समंदर पटेल: जावद से चुनाव लड़ रहे पटेल 2018 में निर्दलीय चुनाव लडकऱ हारे थे।
भाजपा नेताओं के सामने संकट
- मंजू राजेंद्र दादू: नेपानगर से 2018 में चुनाव हारीं।
- अर्चना चिटनीस: बुरहानपुर से 2018 में पराजय।
- राजकुमार मेव: महेश्वर से 2018 में निर्दलीय चुनाव लड़े और हारे।
- आत्माराम पटेल: कसरावद से 2018 में पराजय।
- बालकृष्ण पाटीदार: खरगोन से 2018 में हारे थे।
- अंतरसिंह आर्य: सेंधवा से 2018 में हारे। उम्र अधिक होने से बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे।
- अंतरसिंह पटेल: राजपुर से 2018 में हार।
- नागरसिंह चौहान: अलीराजपुर से 2018 में हारे।
- विशाल रावत: जोबट से 2018 में कांग्रेस से चुनाव लड़े, लेकिन हार हुई। कलावति भूरिया के निधन पर उपचुनाव में मां सुलोचना रावत भाजपा से चुनाव जीतीं।
- भानू भूरिया: झाबुआ में उपचुनाव हारे।
- कलसिंह भाभर: थांदला से 2018 में हार।
- निर्मला भूरिया: पेटलावद से 2018 में हार।
- सरदार सिंह मेड़ा: गंधवानी से 2018 में हार।
- कालुसिंह ठाकुर: धरमपुरी से 2018 का चुनाव हार चुके हैं।
- नीना वर्मा: धार से विधायक हैं, लेकिन भारी विरोध के बीच टिकट मिला। व्यक्तिगत नाराजगी के चलते पूर्व जिला अध्यक्ष राजू यादव ने बागी होकर चुनाव लड़ा।
- मनोज पटेल: देपालपुर से 2018 में चुनाव हारे।
- महेंद्र हार्डिया: इंदौर-5 से चार बार विधायक हैं। हारते हैं तो उम्र की वजह से टिकट पर संकट।
- मधु वर्मा: राऊ से 2018 में चुनाव हारे। उम्र की वजह से भविष्य में संकट।
- अरुण भीमावत: शाजापुर से 2018 में हार। पहले भी एक पराजय।
- राजेश सोनकर: 2018 में सांवेर से चुनाव हारे।
- चिंतामण मालवीय: आलोट से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व में सांसद का चुनाव लड़ चुके हैं।
Updated on:
19 Nov 2023 11:01 am
Published on:
19 Nov 2023 11:00 am

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