
इंदौर. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होलकर स्टेडियम में खेले गए निर्णायक मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार जीत हासिल कर कई रिकॉर्ड बनाए। कई खिलाड़ी रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गए। शहर व आसपास के हजारों क्रिकेटप्रेमियों ने क्रिकेट के जोश, जुनून और जज्बे का मुकाबला भी जीत लिया। असल में, इन सारी सफलताओं के पीछे कुछ ऐसी शख्सियतें हैं, जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से इंदौर को ऐसे गौरवशाली पलों का साक्षी बनाया है। सही मायनों में ये ही मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के विराट, धोनी, रोहित और हार्दिक हैं। आप भी जानिए, सफल आयोजन के पीछे किसका क्या योगदान रहा।
मिलिंद कनमड़ीकर, सचिव, एमपीसीए
मैच की घोषणा के बाद से मिलिंद कनमड़ीकर ने तैयारियां तेज कर दी थीं। नवरात्र और सुरक्षा कारणों से तारीख में बदलाव से लेकर मैच होने तक सारे अहम फैसले उन्होंने लिए। जिला प्रशासन, पुलिस, बीसीसीआई सहित अन्य से तालमेल बैठाने से लेकर प्लानिंग जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने एक माह पहले सफल आयोजन की नींव रख दी।
रोहित पंडित, सीएओ
नागपुर में रहने वाले रोहित पंडित ६ साल से एमपीसीए के साथ हैं। पहले सीईओ थे, अब उन्हें सीएओ (चीफ एडमिनिस्ट्रेटर ऑफिसर) की पोस्ट दी गई है। एक महीने से रात ३ बजे तक काम कर जिम्मेदारी निभाई। पुलिस और प्रशासन के अफसरों को स्टेडियम के हर हिस्से से अवगत कराना, एजेंसियों के टेंडर, नियम शर्तें, आधारभूत सुवधाओं से लेकर खिलाडिय़ों की जरूरतों से जुड़े मुद्दे इन्होंने देखे।
समंदर सिंह चौहान, चीफ पिच क्यूरेटर, एमपीसीए
२३ अगस्त से समंदर सिंह और २० लोगों की टीम ने मैदान व पिच की तैयारियां शुरू की। १० सितंबर के बाद बारिश ने चिंता में डाला। मैच के १० दिन पहले बीमारी के चलते उन्हें अस्पताल में भी दाखिल होना पड़ा, लेकिन ५ दिन भर्ती रहने के बाद फिर मैदान संभाला और शानदार पिच और मैदान की सौगात दी।
संजय जगदाले, पूर्व अध्यक्ष
भीड़ बढऩे पर एक ही दिन में टिकट बेचने के पुलिस-प्रशासन के आग्रह को अमल में लाने का निर्णय जगदाले की सहमति से ही हुआ। बीसीसीआई के सचिव रह चुके जगदाले के वहां के संबंधों को भी इस मैच में अच्छे से इस्तेमाल किया गया। एक ही सत्र में दो अंतरराष्ट्रीय मैच मिलने में कनमड़ीकर और जगदाले का ही प्रयास है।
एमके भार्गव, पूर्व उपाध्यक्ष
१९८३ से अब तक एमपीसीए की मेजबानी में जितने भी मैच हुए, उसका ब्लू प्रिंट यही तैयार करते हैं। ऑनलाइन टिकट बिक्री फेल होने से लेकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस-प्रशासन के साथ तालमेल बैठाने में अहम रोल रहा। ७७ वर्ष की उम्र में जिस ऊर्जा के साथ भार्गव ने बिना पद के जिम्मेदारी संभाली वह सीखने लायक है।
चुडकर- सेठिया की जोड़ी
मैच के दौरान दर्शकों की भारी मांग के बीच टिकटों की दरें, बिक्री व्यवस्था सहित अन्य जिम्मेदारी अहम रहती है। १० वर्ष से दिलीप चुड़कर, महेंद्र सेठिया, प्रवीण कासलीवाल, पवन जैन यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस बार भी पूरा प्लान इनके पास ही था। मीडिया कमेटी के प्रमुख राजीव सिरोड़कर महावीर आर्य, राजू सिंह चौहान व सिटिंग कमेटी के राजेश वलेजा, रमेश कुशवाह, शेर सिंह अमरोदिया ने भी अहम भूमिका निभाई।
Published on:
26 Sept 2017 01:07 pm
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