
एमटीएच महिला अस्पताल में ओपीडी से होगी शुरुआत, काटने पड़ेंगे चक्कर
इंदौर. एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने जुलाई माह में एमटीएच कंपाउड स्थित महिला अस्पताल को शुरू करने की तैयारी कर ली है। हालांकि, सभी सुविधाएं एकसाथ शुरू नहीं हो पाएंगी। ओपीडी लगाने से यहां शुरुआत की जाएगी, इससे मरीजों को सुविधा की बजाए एमवाय अस्पताल तक के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। 8 साल इंतजार के बाद अचानक जल्दबाजी का कारण अस्पताल के शुरू नहीं होने पर नए सत्र में मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट बढ़ाने की जुगत है।
सालों से अफरशाही में उलझे अस्पताल के प्रोजेक्ट की आखिरी समय-सीमा इस वर्ष मार्च माह तक की थी। निर्माण एजेंसी पीआईयू द्वारा अब तक काम पूरा कर इमारत हेंडओवर नहीं की गई है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने जुलाई माह में एक मंजिल पर ओपीडी लगाकर अस्पताल को शुरू करने की योजना बनाई है। अन्य सुविधाएं अगल-अलग हिस्सों में एमवाय अस्पताल से यहां शुरू की जाएगी।
फिलहाल महिला रोग व प्रसूती विभाग की ओपीडी एमवाय अस्पताल में है और पहली मंजिल पर वार्ड है। एमटीएच में ओपीडी शुरू होने पर जांच और आगे के इलाज के लिए महिलाओं को एमवाय अस्पताल के चक्कर काटना पड़ेंगे।
एमवाय अस्पताल में हर माह 1500 प्रसूती शहर में सबसे ज्यादा होती हैं। एमटीएच अस्पताल के शुरू करने का अवश्य ही एक छत के नीचे गर्भवती महिलाओं के इलाज, प्रसूति और नवजात बच्चों की देखरेख होना है। 550 बिस्तर का यह अस्पताल प्रदेश में सबसे बड़ा महिला अस्पताल होगा।
यह सुविधाएं जुटाना हैं
एमटीएच अस्पताल में 425 बेड महिलाओं और 75 बेड बच्चों के लिए होंगे। एसएनसीयू, पीआईसीयू, ब्लड बैंक, सोनोग्राफी, इंडोस्कॉपी, सर्जरी, मेडिसिन, शिशुरोग, एनेस्थीसिया, पैथोलॉजी, माइक्रोबायलॉजी जैसे विभाग होंगे। चार ओटी, ह्यूमन मिल्क बैंक आदि सुविधाएं भी शुरू की जाना है।
जल्दबाजी की वजह
कॉलेज प्रबंधन अस्पताल के लोकार्पण की जल्दबाजी इसलिए दिखा रहा है, क्योंकि 7 जुलाई को कॉलेज की एमबीबीएस सीट को 150 से बढ़ाकर 250 का आवेदन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को करना है।
अक्टूबर माह में एमसीआई की टीम दौरा करने आएगी। एमटीएच महिला अस्पताल को 150 करोड़ के अपग्रेशन प्रोजेक्ट में शामिल किया है। अस्पताल शुरू नहीं होने पर मान्यता पर संकट आ जाएगा।
10 साल की कवायद
वर्ष 2010 में बनी डीपीआर में अस्पताल 550 बेड का मंजूर हुआ था। पुरानी बिल्डिंग तोड़ दी गई, लेकिन काम में देरी होने से लागत बढ़ती गई। लागत बढऩे से 150 बेड का बनाना पड़ा। ऐसी स्थिति भी आई कि 100 बेड का बनाने की हालत भी नहीं रही। वर्ष 2015 में इसका काम रुकवाया गया।
प्लानिंग के अनुसार तीन ब्लॉक में आईसीयू, ओटी, पैथोलॉजी बनना है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए राज्य शासन से 18 करोड़ की मांग की गई। आखिर अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट में शामिल कर 17 करोड़ रुपए एक साल पहले मंजूर हुए।
अगले माह शुरू होगा
अगले माह अस्पताल शुरू हो जाएगा। सुविधाएं अलग-अलग हिस्सों में शुरू करने की योजना है, ताकि काम जल्द पूरा हो सके। 15 से 20 दिन में इमारत हेंड ओवर हो जाएगी। सबसे पहले ओपीडी शुरू होगी। उपकरण खरीदी का काम केन्द्र सरकार के जेम्स पोर्टल से शुरू कर दिया है।
फिलहाल उपलब्ध स्टाफ से काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद नए की भर्ती होगी। मरीजों को परेशानी नहीं हो, इसके लिए एमवाय अस्पताल से महिला रोग व प्रसूति विभाग को पूरी तरह से यहां शिफ्ट किया जाएगा।
डॉ. शरद थोरा, डीएन एमजीएम मेडिकल कॉलेज
Published on:
27 Jun 2018 01:33 pm
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