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30 साल इंदौर के लिए ताई करती रहीं संघर्ष…ऐसे कैसे भूला नगर निगम

राजबाड़ा-गोपाल मंदिर के आयोजन में नहीं दिया न्योता, उनकी पहल पर शुरू हुआ था जीर्णोद्धार, विशेष रुचि के चलते लगातार करती थीं निरीक्षण  

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30 साल इंदौर के लिए ताई करती रहीं संघर्ष...ऐसे कैसे भूला नगर निगम

30 साल इंदौर के लिए ताई करती रहीं संघर्ष...ऐसे कैसे भूला नगर निगम

इंदौर। राजबाड़ा और गोपाल मंदिर के जीर्णोद्धार की पहल करने वाली 30 साल सांसद रहीं सुमित्रा महाजन को ही नगर निगम भूल गया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में लोकार्पण कार्यक्रम किया गया, लेकिन उन्हें आने का न्योता तक नहीं दिया गया। स्वाभिमानी ताई जहां का न्योता मिला, वहां अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर घर लौट गईं।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपए खर्च करके राजबाड़ा और गोपाल मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। कल मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हाथों लोकार्पण किया गया। एक तरह से कार्यक्रम नगर निगम का ही था, क्योंकि प्रोजेक्ट उसके अधीन ही है। कार्यक्रम को लेकर नगर निगम की तरफ से सभी को न्योता दिया गया, उसमें निगम एक बड़ी चूक कर बैठा।
इंदौर का देश के सबसे बड़े सदन में तीन दशक प्रतिनिधित्व करने वाली सुमित्रा महाजन (ताई) को भूल गया। उन्हें किसी भी प्रकार से निमंत्रण पत्र नहीं दिया गया, जबकि राजबाड़ा और गोपाल मंदिर के जीर्णोद्धार में उनकी विशेष रुचि थी। इसको लेकर उन्होंने पहल भी की थी। लोकसभा स्पीकर रहते कई बार दौरे किए और अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए।
बड़े फैसलों के दौरान तत्कालीन संभागायुक्त संजय दुबे ने ताई से संपर्क कर चर्चाएं भी की थीं। उनके अहम योगदान को नगर निगम उद्घाटन में भूल गया। चौंकाने वाली बात ये है कि ताई को एमवाय अस्पताल के आई हॉस्पिटल का न्योता था तो वे दोपहर में वहां गईं और मुख्यमंत्री के साथ कार्यक्रम में मौजूद रहीं। बाद में वहां से सीधे घर पहुंच गईं। उन्होंने किसी से बोला भी नहीं कि उन्हें नहीं बुलाया गया।

भव्य आयोजन की मंशा पर फिर गया पानी
गौरतलब है कि राजबाड़ा इंदौर की शान है तो गोपाल मंदिर मान है। दोनों ही नए स्वरूप में तैयार हो गए हैं, जिनको लेकर ताई चाहती थीं कि तीन दिनी भव्य आयोजन हो। उसमें अतिथियों के अलावा पूरा शहर भी शामिल रहे। ताबड़तोड़ कार्यक्रम करके उनकी मंशा पर पानी फेर दिया गया। विडंबना ये है कि उनसे पूछा तक नहीं गया। बात की गई होती तो वे अपनी भावनाएं व्यक्त करतीं। ताई की टीम चाहती थी कि इंदौर स्थापना दिवस 31 मई को इसका धूमधाम से लोकार्पण किया जाता तो यादगार हो जाता।

तीन नंबरी विधायक ने नहीं दिया फोटो
विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भी विधानसभा को मिलने वाली सौगात के चलते ताकत लगाई। बकायदा प्रचार-प्रसार भी किया। उसके अंतर्गत दोनों ही सौगातों के पीछे की शिल्पकार ताई का फोटो नहीं दिया गया। गौरतलब है कि ताई और भाई में शुरू से पटरी नहीं बैठती है। अपने पिता की उसी परंपरा को आकाश भी निभा रहे हैं।

मुख्यधारा में लाए मोघे को
गौरतलब है कि कल आयोजन में वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे की कुर्सी कोने में लगी हुई थी। जब मंच पर नगर भाजपा अध्यक्ष गौरव रणदिवे पहुंचे तो उन्होंने बैठने के क्रम को देखा तो चकित हो गए, क्योंकि मोघे की वरिष्ठता का अपमान हो रहा था। उन्होंने तुरंत मोघे की कुर्सी मंत्री तुलसीराम सिलावट व सांसद शंकर लालवानी के बीच में लगवा दी। बाद में कार्यक्रम में भी मोघे को खासी तवज्जो दी।