
muskan group
इंदौर. शहर में कई संस्थाएं और ट्रस्ट हैं जिनमें बाकायदा कार्यकारिणी होने के साथ बहुत सारे पदाधिकारी होते हैं। इन संस्थाओं के चुनाव भी होते हैं लेकिन शहर में एक ऐसी संस्था है जिसमें कोई पदाधिकारी नहीं है। इसमें संस्था से जुड़े लोग शहर के लोगों की हर परेशानी में मदद करते हैं। यहां हम बात कर रहे है मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट यानी मुस्कान गु्रप की। करीब 180 सदस्यों वाली संस्था मुस्कान ग्रुप की शहर में अलग पहचान है। ग्रुप के सारे सदस्य नौकरी पेशा और व्यवसायी हैं। अपने काम से समय निकालकर सब लोग आए दिन ऐसा काम करते रहते हैं जिससे कि आम जनता के साथ प्रशासन की भी मदद हो जाती है। बात सामाज सेवा की हो, स्वास्थ्य की या फिर शिक्षा की। बड़े-छोटे की भावना से परे होकर जरूरतमंदों की मदद की जाती है। ये सिलसिला 28 वर्षों से लगातार जारी है। 8 अलग अलग प्रकल्पों को हेमंत छाबडिय़ा, नरेश शामानी, कविता वाधवानी, जयश्री विरानी, संदीपनी आर्य, जीतू बागानी, दीपक बाबा और नरेश फुदवानी समेत सभी सदस्य संभालते हैं।
ये काम करता है ग्रुप
- अंग दान के लिए 25 माह में 28 ग्रीन कॉरिडोर बने हैं जिसमें से अधिकतर में संस्था के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ब्रेन डेड होने वाले व्यक्ति के परिजन को अंगदान के लिए तैयार करने से लेकर ग्रीन कॉरिडोर बनने तक की गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका ग्रुप के सदस्य निभाते हैं।
- निर्धन वर्ग के बच्चों को पढ़ाई करने में किसी तरह की दिक्कत ना हो इसके लिए हर साल स्कूली बच्चों को कॉपी- किताबें, बेग समेत स्टेशनरी का वितरण किया जाता है।
- लावारिस व्यक्ति की मौत के समय मुस्कान ग्रुप की गतिविधियां सराहनीय होती हैं। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार भी संस्था सदस्य करते हैं। इसमें खास बात यह होती है कि मृतक के धर्म के अनुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाता है।
- एक ऐसा वर्ग भी है जो विवाह का खर्च वहन नहीं कर पाता है। हर साल ग्रुप द्वारा नि:शुल्क विवाह सम्मेलन का किया जाता है जिसमें जोड़ों को गृहस्थी का सामान भी दिया जाता है।
- समय समय पर ग्रुप के सदस्य ब्लड डोनेशन कैंप भी आयोजित करते हैं। इसमें ग्रुप के सदस्यों के साथ ही अन्य नागरिकों को भी डोनेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
Published on:
03 Dec 2017 02:25 pm
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