
इंदौर. दुकान के बाहर बदहवास हालत में महिला और पुरुष हाथों में दुकान के अंदर का लिए बाहर खड़ी अपनी गाडिय़ों में रख रहे हैं। अंदर से एक युवक हाथों में दुकान के अंदर लगी ट्यूबलाइट्स निकाल कर बाहर खड़ी कार में रखने लगता है। कार में पहले से ही फाइलें, दस्तावेज, दुकान में रखा अन्य सामान रखा है। इसी बीच एक अन्य व्यक्ति दुकान में लगा टेलिफोन निकाल रहा है। सभी के चेहरे की हवाईयां उड़ रही हैं। दिवाली के त्योहार के दिन यह नजारा हर किसी को अचंभित और झकझोर रहा था।
यह दृश्य है... बीआरटीएस पर शिवाजी प्रतिमा के पास स्थित नगर निगम के शिवाजी वाटिका मार्केट स्थित सुविधा ऑटो का। ये दृश्य दिवाली पर सफाई का नहीं, बल्कि ऐन दिवाली के दिन बेरोजगार होने वाले दुकानदारों के बीच अपनी दुकान के सामान को बचाने के लिए मची भगदड़ का था। दिवाली के दिन एक बार फिर नगर निगम का कहर 250 परिवारों पर टूटा। शिवाजी मार्केट की 250 दुकानों के दुकानदारों को दिवाली के दिन ही निगम ने दुकानें खाली करने के लिए मजबूर किया। बुधवार को ही एसडीएम कोर्ट से दुकानें खाली करने के लिए नोटिस जारी हुआ और दिवाली के दिन दोपहर में नगर निगम की गाड़ी से यहां ऐलान करवा दिया गया कि यदि शाम तक दुकानें खाली नहीं हुईं, तो उन्हें सील कर देंगे। एक अन्य दुकान जिसमें मैकेनिकल काम होता है, उसमें मौजूद चार लडक़े दुकान में रखे औजार और सामान उठाकर लोडिंग में चढ़ा रहे हैं। यहां एक लोडिंग रिक्शा अंदर मौजूद एक दुकान के आगे लगती है। जिसमें कुछ अन्य लोग जो दुकानों के अंदर से सामान निकालकर रख रहे थे, वो पूरा सामान लोडिंग में रखने लगते हैं। पूरे समय वहां ऐसी ही हड़बड़ी मची रही, जिसने त्योहार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया।
बुधवार शाम ७ बजे नोटिस चस्पा किए
नेहरू स्टेडियम सौंदर्यीकरण के लिए नगर निगम ने डेढ़ साल पहले शिवाजी वाटिका और छोटा नेहरू स्टेडियम पर बनी 250 से ज्यादा दुकानों को खाली कराना शुरू किया था, तो दुकानदारों ने हाई कोर्ट में केस दायर कर दिया। वहीं नगर निगम की ओर से एसडीएम कोर्ट में दुकानें खाली कराने के लिए केस लगाया गया था। बुधवार को इस केस की तारीख थी। दुकानदारों को सुनवाई कर रही एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव ने उन्हें यह कहकर रवाना कर दिया कि आदेश शाम तक आप तक पहुंच जाएगा। हुआ भी यही, शाम 7 बजे दुकानों को 24 घंटे में खाली करने के लिए नोटिस चस्पा कर दिए।
जो साधन मिला, उसी में भरा सामान
गुरुवार को दोपहर में निगम की गैंग पहुंची और उसने माइक से यहां मुनादी की, ‘दुकानों को खाली करने के लिए एसडीएम कोर्ट की समयसीमा पूरी हो रही है, दुकानें खाली करें, अन्यथा सील कर दी जाएंगी।’ इससे पूजन के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे दुकानदारों में हडक़ंप मच गया। जिसे जो साधन मिला, उससे वह उसमें दुकान का सामान भर कर ले जाने में जुट गया।
अपना पक्ष भी नहीं रखने दिया
सुविधा ऑटो गैस के नीरज अग्निहोत्री ने कहा, किसी भी दुकानदार को सुनवाई को लेकर कोई जानकारी नहीं थी। दुकानदार बुधवार को कोर्ट भी गए थे, लेकिन उन्हें कुछ नहीं बताया। इसके पहले की चार सुनवाई में भी उन्हें यहां कार्रवाई को लेकर एसडीएम कोर्ट से कोई जानकारी नहीं दी गई। केवल अगली तारीख बताई जाती। उन्हें सही तरह से अपना पक्ष भी नहीं रखने दिया।
अपील करने के लिए भी समय नहीं दिया
एसडीएम कोर्ट ने दिवाली के एक दिन पहले आदेश जारी कर 24 घंटे की मोहलत दी। गुरुवार को जिला न्यायालय और हाई कोर्ट में दिवाली अवकाश होने से दुकानदार अपील भी नहीं कर पाए। मामले में निगम का कोई अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। निगम के उपायुक्त लोकेंद्रसिंह सोलंकी ने कहा, हम दिवाली के दिन कोई दुकानें खाली नहीं कराईं केवल दुकानदारों को एसडीएम कोर्ट की समय सीमा याद दिला रहे थे।
लगातार तीसरी दिवाली खराब
यह पहला मौका नहीं है जब निगम की हठधर्मिता के चलते शहरवासियों की दिवाली खराब हुई हो। 2015 में दिवाली के सप्ताह में ही कनाडिय़ा रोड के घरों पर बुलडोजर और पोकलेन चलाई थी। 2016 दिवाली पर गणेशगंज के रहवासियों को घर खाली करने को मजबूर किया। बियाबानी में घर तोडक़र लोगों को गंदगी और धूल में रहने के लिए मजबूर कर दिया था।
महापौर ने की थी घोषणा : एक सप्ताह पहले महापौर मालिनी गौड़ ने कहा था, त्योहार के समय निगम कोई रिमूवल कार्रवाई नहीं करेगा। सडक़ किनारे दुकान लगाने वालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
Published on:
21 Oct 2017 08:55 am
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