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Shardiya Navratri: इस प्रसिद्ध देवी मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूर्ण होती है मनोकामना

मान्यता : मनोकामना पूरी होने पर सीधा स्वास्तिक बनाने आते हैं भक्त।

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Shardiya Navratri: इस प्रसिद्ध देवी मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूर्ण होती है मनोकामना

Shardiya Navratri: इस प्रसिद्ध देवी मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाने से पूर्ण होती है मनोकामना

इंदौर. शारदीय नवरात्र (Shardiya Navratri) की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है। माता की अगवानी के लिए शहर तैयार है। मंदिरों में आकर्षक साज-सज्जा की जा रही है। माता की मूर्ति विराजित करने के लिए पंडाल भी तैयार हो रहे हैं। शहर का बिजासन माता मंदिर (Bijasan Mata Mandir) भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल नवरात्र में लाखों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

नवरात्र मेले की तैयारी शुरू
श्री बिजासन माता मंदिर समिति के प्रबंधक श्रीकांत पाठक ने बताया कि यहां पर नौ दिनी मेला लगेगा। इसे लेकर मंदिर की साज-सज्जा शुरू हो गई है। पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। मंदिर पहाड़ी पर स्थित होने से वाहनों का ऊपर जाना प्रतिबंधित रहेगा। एयरपोर्ट गेट से दिलीप नगर तक लाइटिंग के लिए हेलोजन लगाए जा रहे हैं। दिलीप नगर पर चौराहे व मुख्य मंदिर के सामने कंट्रोल रूम बनेगा। तीन बैरिकेड्स से दर्शन की व्यवस्था रहेगी। दर्शन कर मंदिर के पीछे से गार्डन की तरफ से बाहर निकाला जाएगा।

लगेगा मेडिकल कैंप

सीढिय़ों से आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़ कम होने पर टीनशेड के पास से लाइन बनवाई जाएगी। मां शक्ति सेवा मंडल द्वारा नि:शुल्क आरओ का पानी, सुबह चाय-नाश्ता, दोपहर में छाछ, पूड़ी-सब्जी, फरियाली की प्रसादी नौ दिनों तक बांटी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग का मेडिकल कैंप भी लगेगा। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन पूरी व्यवस्था संभालेगा।

माता को माना जाता है पुत्रदायिनी
मंदिर की मान्यता है कि यहां भक्त उल्टा स्वस्तिक बनाकर जाते हैं और मनोकामना पूरी होने पर सीधा स्वस्तिक बनाने आते हैं। यह परंपरा बिजासन मंदिर में कई सालों से चली आ रही हैं। मां के आर्शीवाद से नि:संतान भक्तों की गोद भर रही है। बिजासन माता को शहर की कुलदेवी के रूप में भी पूजा जाता है। मंदिर परिसर में मां बिजासन के साथ भैरव बाबा, हनुमान जी सहित अन्य देवी-देवताओं की भी आराधना होगी।

15 पीढिय़ां कर रहीं सेवा
मंदिर के पुजारी सतीशवन गोस्वामी ने बताया कि उनके परिवार की 15 पीढिय़ां माता की सेवा में रही हैं। माता रोज तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं। माता को पुत्रदायिनी माना जाता है। भक्त संतान की कामना के लिए दरबार में आते हैं। भक्तों द्वारा लाए गए चावल व नारियल से गोद भराई करते हैं। कामना पूरी होने पर माता के दरबार में संतान को लेकर आते हैं।