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रैगिंग रोकने में दिलचस्पी नहीं, 100 से ज्यादा कॉलेजों को नोटिस जारी

- एंटी रैगिंग कमेटी के गठन में लापरवाही बरत रहे कॉलेज

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रैगिंग रोकने में दिलचस्पी नहीं, 100 से ज्यादा कॉलेजों को नोटिस जारी

रैगिंग रोकने में दिलचस्पी नहीं, 100 से ज्यादा कॉलेजों को नोटिस जारी

इंदौर.
रैगिंग रोकने के लिए यूजीसी और सरकार की तमाम सख्ती कॉलेजों की लापरवाही के आगे दम तोड़ती नजर आ रही है। शहर के ज्यादातर कॉलेजों ने सत्र शुरू हुए दो माह बीतने के बाद तक एंटी रैगिंग कमेटियों का गठन करने में ही रुचि नहीं दिखाई। कई बार कमेटी गठन के लिए पत्र लिख चुकी यूनिवर्सिटी अब इन कॉलेजों को शोकॉज नोटिस जारी कर रही है। सप्ताहभर में एंटी रैगिंग कमेटी नहीं बनाने वाले कॉलेजों पर कार्रवाई के लिए शासन को भी पत्र लिखा जाएगा।
हाल ही में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में सीनियर छात्रों द्वारा जूनियरों के साथ मार-पीट का मामला सामने आया है। इसमें अब तक सीनियरों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। जूनियरों ने मदद की गुहार सीधे यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी को लगाई तो मामले का खुलासा हुआ। पुलिस में भी केस दर्ज हुआ लेकिन, इस प्रकरण में अब तक रैगिंग लेने वाले सीनियरों की पहचान नहीं हो सकी है। रैगिंग की इस घटना के पीछे सबसे बड़ी वजह कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी की निष्क्रियता रही है। इसके बाद देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए जुलाई माह में ही एंटी रैगिंग कमेटियों का गठन तक जानकारी भेजने को कहा था। इन निर्देशों पर निगती के ही कॉलेजों ने अमल करते हुए कमेटी बनाई। बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद अब भी सौ से अधिक ऐसे कॉलेज है जहां एंटी रैगिंग कमेटी आस्तित्व में नहीं आई है। अब इन कॉलेजों को शोकॉज नोटिस जारी किए गए है। कॉलेजों से पूछा जा रहा है कि एंटी रैगिंग कमेटी का गठन क्यों नहीं किया गया? और रैगिंग कमेटी के अभाव में अगर रैगिंग की कोई घटना होती है तो क्यों ना कॉलेज प्रबंधन को ही इसका जिम्मेदार माना जाएं।

शासन को भेजी जाएगी सूची
डीएवीवी के छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो.एलके त्रिपाठी ने बताया, करीब 50 फीसदी कॉलेजों से अब तक एंटी रैगिंग कमेटी गठित होने की जानकारी नहीं मिली है। इन कॉलेजों को नोटिस जारी किए जा रहे है। अब भी ये कॉलेज लापरवाही बरतते है तो कार्रवाई के लिए उच्च शिक्षा विभाग को इन कॉलेजों के नाम भेजे जाएंगे।