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Indore News : अब इंदौर में देश का दूसरा स्लज ट्रीटमेंट प्लांट

कबीटखेड़ी पर प्रतिदिन 20 टन खतरनाक गंदगी का हो रहा निपटान और बन रही खाद, भाभा एटॉमिक रिसर्स सेंटर ने अहमदाबाद के बाद इंदौर में शुरू किया काम

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Indore News : अब इंदौर में देश का दूसरा स्लज ट्रीटमेंट प्लांट

Indore News : अब इंदौर में देश का दूसरा स्लज ट्रीटमेंट प्लांट

उत्तम राठौर

इंदौर. शहर के इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है, क्योंकि देश का दूसरा स्लज ट्रीटमेंट प्लांट इंदौर में शुरू हो गया है। कबीटखेड़ी पर बने इस प्लांट पर अभी प्रतिदिन 20 टन खतरनाक गंदगी का निपटान कर खाद बनाई जा रही है। भाभा एटॉमिक रिसर्स सेंटर की मदद से यह प्लांट तैयार हुआ है। अहमदाबाद के बाद इंदौर में यह दूसरा प्लांट है, जिस पर भाभा ने काम शुरू किया है।

सीवर (ड्रेनेज) के गंदे पानी का ट्रीटमेंट कर साफ करने का प्लांट कबीटखेड़ी में लगाया गया है।जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत यह प्लांट 245 एमएलडी का है। पूरे शहर के ड्रेनेज का पानी कबीटखेड़ी एसटीपी पर नहीं पहुंचता था और कान्ह-सरस्वती नदी सहित नालों में गिरता था। 245 एमएलडी प्लांट पर 125 एमएलडी ही सीवर का पानी पहुंचता था। पूरा 245 एमएलडी पानी कबीटखेड़ी प्लांट पर पहुंचाने के लिए निगम ने नाला टेपिंग कर सार्वजनिक और घरेलू रूप से नदी-नालों में गिरने वाले ड्रेनेज के पानी को बंद किया। नाला टेपिंग के बाद पाइप के जरिए ड्रेनेज का पानी कबीटखेड़ी एसटीपी पर पहुंचाना शुरू हुआ। यहां ड्रेनेज के पानी को साफ करके बगीचों, सार्वजनिक-सामुदायिक शौचालयों, मूत्रालयों, सडक़, फुटपाथ और डिवाइडर सहित निर्माण संबंधित काम में लेना शुरू कर दिया है। गंदा पानी ट्रीट होने के बाद स्लज (गंदगी) निकलती है, जो खतरनाक और बदबूदार होने के साथ मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है। इसमें कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस का होना है।

स्लज निपटान को लेकर निगम के पास कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में स्लज को गड्ढा खोदकर दफन कर दिया जाता था। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले इस खतरनाक स्लज का निपटान करने की प्लानिंग निगम ने की। इसके तहत मुंबई स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) से संपर्क किया गया। सेंटर के अफसरों ने इंदौर आकर कबीटखेड़ी पर कई बार विजिट की और फिर स्लज निपटान को लेकर प्लांट लगाने की मंजूरी दी। इसके लिए निगम ने भाभा को तकरीबन चार एकड़ जमीन दी। इस पर आज प्लांट तैयार होने के साथ स्लज का निपटान करना शुरू कर दिया गया है।

5 करोड़ रुपए का कोबाल्ट मिल रहा मुफ्त

प्लांट पर स्लज का निपटान रेडिएशन से किया जा रहा है। इसमें यूरेनियम होता है। इसके लिए लगने वाला कोबाल्ट (ईधन) करोड़ों रुपए का आता है, जो निगम को भाभा की तरफ से मुफ्त में मिल रहा है। निगम को 500 टन कोबाल्ट नि:शुल्क दिया जा रहा है। इसकी कीमत बाजार में 5 करोड़ रुपए है। यह कोबाल्ट आने वाले 12 वर्ष तक चलेगा। कोबाल्ट को लेकर भाभा से तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह के समय एमओयू हुआ था, इसलिए निगम को अभी कोबाल्ट खरीदना नहीं पड़ा।

20 करोड़ से ज्यादा खर्च

भाभा ने स्लज निपटान के लिए पहला प्लांट अहमदाबाद और दूसरा प्लांट इंदौर में लगाया है। इंदौर में लगे प्लांट पर 20 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुए हैं। यह पैसा निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत खर्च किया है।

100 टन क्षमता का प्लांट

कबीटखेड़ी पर स्लज निपटान प्लांट की क्षमता 100 टन है। इसमें 1500 रेडिएशन की यूनिट (केसीआई) लगना है। अभी 20 टन स्लज निकलने पर 150 केसीआई लग रही है। आगे 5 वर्ष तक ऐसे ही चलेगा। इसके बाद पूरी क्षमता के प्लांट को चलाया जाएगा।

प्लांट लगाने में लगे तीन वर्ष

भाभा को प्लांट लगाने में तकरीबन तीन वर्ष लग गए, क्योंकि जमीन मिलने के बाद वर्ष-2019 में काम शुरू किया गया। प्लांट शुरू होने के बाद प्रतिदिन 20 टन खतरनाक स्लज का निपटान कर आर्गेनिक खाद बनाई जा रही है। इसका उपयोग बगीचों में हो रहा है। कबीटखेड़ी के अलावा अमृत प्रोजेक्ट के तहत कान्ह-सरस्वती नदी पर सात और पीपल्याहाना तालाब के पास नाले पर एक एसटीपी बनाया गया है। वर्तमान में सिरपुर तालाब पर प्लांट बनाने की प्लानिंग की गई है। कबीटखेड़ी के अलावा अन्य जगहों पर बने एसटीपी को मिलाकर रोज 30 से 35 टन तक स्लज निकलता है। आने वाले समय में स्लज प्लांट पूरी क्षमता से चलेगा। गौरतलब है कि खतरनाक स्लज निपटान को लेकर कागजी प्लानिंग वर्ष-2017 में की गई थी, लेकिन धरातल पर काम शुरू होने में दो वर्ष लग गए।