शहर में मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल तक व्यवस्थाओं ने दम तोड़ा, नर्सों की हड़ताल का पांचवा दिन
इंदौर. नर्सों की हड़ताल का आज पांचवा दिन है। शहर के सरकारी अस्पतालों की हालत खराब हो रही है।सबसे ज्यादा कष्ट में गर्भवती महिलाएं और नवजात बच्चे हैं। इनकी कोई केयर नहीं, कोई खैर खबर नहीं है। दुनिया में आते ही नवजात जिस तरह के हालातों से दो चार हो रहे हैं, उन्हें कैसा अहसास हो रहा होगा। या हम उन्हें एक बेहतर दुनिया से परचिय नहीं करवा सकते? या हड़ताल का कोई विकल्प नहीं? हड़ताल से मेडिकल कॉलेज से संबंधित हॉस्पिटल प्रभावित हो गए हैं। इसमें एमवायएच से लेकर कैंसर हॉस्पिटल, चाचा नेहरू, सुपर स्पेशियलिटी, एमआरटीबी, एमटीएच हॉस्पिटल शामिल है।
प्रदेशभर में नर्सिंग स्टाफ हड़ताल पर है। हड़ताल ने अस्पतालों की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। इससे हड़ताल का सबसे अधिक मरीज प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों से लेकर डॉक्टर को दिखाने ओपीडी में आने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने अस्थाई रूप से नर्सों की व्यवस्था तो की है, लेकिन अनुभव की कमी होने से मरीजों की फजीहत ही हो रही है। प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल में इस हड़ताल ने सर्जरी तक प्रभावित कर दी है। हड़ताल का असर गर्भवती महिलाओं पर भी अधिक देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल की स्थिति तो ऐसी हो गई है कि वहां मरीज केवल एक संविदा नर्स के भरोसे ही हैं। पीसी सेठी में भी ऐसे ही हालात हैं। नर्सिंग एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि मांगों पर आश्वासन नहीं अब केवल आदेश आने पर हड़ताल समाप्त करेंगे। वहीं आज थाली बजाकर प्रदर्शन किया जाएगा।
इंदौर ही नहीं पूरे प्रदेश में नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के आह्वान पर नर्सें हड़ताल पर हैं। इंदौर में ही 9 से 10 हजार नर्सें हड़ताल पर हैं। एमवायएच में मेनगेट पर 10 जुलाई से धरने पर बैठकर नर्सों ने काम बंद हड़ताल कर दी है। आज हड़ताल का पांचवां दिन है। इस हड़ताल से मेडिकल कॉलेज से संबंधित हॉस्पिटल प्रभावित हो गए हैं। इसमें एमवायएच से लेकर कैंसर हॉस्पिटल, चाचा नेहरू, सुपर स्पेशियलिटी, एमआरटीबी, एमटीएच हॉस्पिटल शामिल है। हालांकि यहां पर प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने अस्थाई रूप से व्यवस्थाएं की हैं और नर्सिंग के छात्रों की ड्यूटी लगाई है, लेकिन नर्सिंग एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष नटवर पाराशर का कहना है कि इन छात्रों का अनुभव की कमी है। ऐसे में मरीजों के साथ किसी भी प्रकार की घटना घट सकती है।
मरीजों को इंजेक्शन, बाटल तक नहीं लग पा रही
इधर, पीसी सेठी हॉस्पिटल हो या फिर एमटीएच यहां पर प्रसूति के लिए आने वाली महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं है। जिला अस्पताल ने तो मरीजों को रेफर करना शुरू कर दिया है। वहीं एमटीएच पर लोड बढ़ गया, यहां पर भी नाममात्र का नर्सिंग स्टाफ है। पीसी सेठी में सभी नर्सें हड़ताल में शामिल हो गई हैं। ऐसे में इन हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों की देख रेख से लेकर उन्हें इंजेक्शन और बॉटल तक लगाने वाले नहीं है।
विधानसभा चुनाव का बहिष्कार की चेतावनी
इधर, पांच सूत्रीय मांग को लेकर हड़ताल पर चल रही नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष पराशर ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मांगें पूरी नहीं की तो नर्सें और उनके परिवार विधानसभा चुनाव तक का बहिष्कार करेंगे।