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पुराण के जरिए समझें, क्यों मनाया जाता है ओणम का त्योहार

उत्सव के उत्साह के बीच समाजजन ने एक-दूसरे को बधाई दी।

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Kamal Singh

Sep 26, 2016

onam celebration

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इंदौर. शहर में ओणम उत्सव की धूम मची हुई है। मलयाली समाज ने रविवार को धूमधाम से ओणम का त्योहार मनाया। पारंपरिक परिधानों में महिलाओं ने रंगोली बनाई। उत्सव के उत्साह के बीच समाजजन ने एक-दूसरे को बधाई दी।

उत्सवों की श्रृंखला के बीच रविवार को ओणम महोत्सव की शुरुआत हुई। उत्सव का विभिन्न स्थानों का विभिन्न स्थानों पर फूलों की आकर्षक रंगोली बनाकर स्वागत किया गया। शहर में रहने वाले समाज के लोगों का विश्वास है कि तिरुलोणम वह अवसर है, जब सम्राट महाबली की आत्मा केरल की यात्रा करती है। इस उपलक्ष्य में स्थान-स्थान पर सहभोज और उत्सव का आयोजन होता है। महोत्सव के तहत शहर में भी बड़े पैमाने पर इस पर्व को मनाते हैं।

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केरल के प्रसिद्ध त्योहार ओणम के माध्यम से नई संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। इस अवसर पर महिलाएं आकर्षक ओणमपुक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाई जाती है और केरल की प्रसिद्ध आडाप्रधावन (खीर) का वितरण किया जाता है। ओणम के उपलक्ष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल-कूद प्रतियोगिताएं होती है। इन प्रतियोगिताओं में लोकनृत्य, शेरनृत्य, कुचीपुड़ी, ओडि़सी, कथक नृत्य प्रतियोगिताएं प्रमुख हैं।

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पुराणों में ओणम की गाथा
ओणम त्योहार सम्राठ महाबली से जुड़ा है। यह पर्व उनके सम्मान में मनाया जाता है। लोगों का विश्वास है, कि भगवान विष्णु के पांचवे अवतार वामन ने चिंगम मास के इस दिन सम्राट महाबली के राज्य में प्रकट होकर उन्हें पाताललोक भेजा था।

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इतिहास की नजर में
माना जाता है कि ओणम पर्व का प्रारंभ संगम काल के दौरान हुआ था। उत्सव के संबंधित अभिलेख कुलसेकरा पुरुमल (800 ईस्वी) के समय से मिलते है। उस समय ओणम पर्व पूरे माह चलता था।