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ऑनलाइन जुए का मायाजाल, बर्बाद हो रहे घर

आत्महत्या और अपराध की ओर कर रहे रुख  

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इंदौर

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Manish Yadav

Jun 08, 2022

crime

ऑनलाइन ठगी : तत्काल एफआईआर नहीं, इसलिए गिरफ्तारी में होती है मुश्किल रिकवरी से लेकर गिरफ्तारी तक होती है मुश्किल

केस-1
चौधरी पार्क में रहने वाले युवक बसंत ने फांसी लगा ली। पुलिस जांच में उसके बिस्तर से सुसाइड नोट मिला। जिसमें ऑनलाइन गेम में रुपए हारने और कर्जा होने के कारण परेशान होने की बात लिखी है। जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली।
केस-2
भंवरकुआं थाना क्षेत्र में जितेंद्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके पास से सुसाइड नोट मिला जिसमें ऑनलाइन गेम में रुपए हारने के बाद कर्जा हो गया। कर्ज से परेशान होकर उसने अपनी जान देने की बात लिखी थी।
केस-3
साइबर सेल के पास शिकायत पहुंची जिसमें बैंक खाते से रुपए निकाले जाने की शिकायत मिली। इस पर जांच की गई तो पता चला कि बेटे ने ही यह रुपए इस्तेमाल किए हैं। गेम खेलने के परिवार से छिपा कर उसने गेम खेलने के लिए इन रुपयों का इस्तेमाल किया है।

इंदौर। जुआ खेलने के लिए पहले ताश पत्ते और दूसरे साधन इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। समय बदला और तकनीक ने सब बदल कर रख दिया। अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन गेम के रूप में जुआ खेल रहे। इस ऑनलाइन गेम या कहें कि जुए की इस लत में अब तक कई घरों को बर्बाद कर दिया है। नाबालिगों से लेकर युवक तक इसकी लत का शिकार हो रहे। इस गेम के चक्कर में वे या तो आत्महत्या कर रहे हैं या फिर किसी न किसी अपराध के भागीदार बन कर अपना भविष्य खराब कर रहे हैं।

पहले मजा फिर फंसते जाते हैं
साइबर एक्सपर्ट गौरव रावल ने बताया कि इन सभी गेम को इस तरह से बनाया जाता कि अगले लेवल को एक उत्सुकता बनी रहती है। पहले पॉइंट्स को लेकर खेलते हैं फिर रुपए को लेकर खेलते हैं। पहले रुपए हारते हैं फिर इन रुपयों को वापस लाने के लिए खेलते हैं। वह जब तक समझ पाते हैं तब तक एक बड़ी रकम हार चुके होते हैं। तब अवसाद में या तो आत्महत्या कर लेते हैं या फिर इन रुपयों को कमाने के लिए अपराध का रास्ता अपना लेते हैं।
समय दें परिवार को
एक्सपर्ट की मानें तो बच्चे और बड़े दोनों को ही परिवार को समय देना चाहिए। उन्हें मोबाइल से दूर रखना होगा। परिजन को ध्यान रखना होगा कि बच्चे या बड़ेे मोबाइल पर इतना समय किस ऐप पर बिता रहे हैं। उससे बात करके अवसाद में जाने से पहले ही रोक सकते हैं।