
पद्मभूषण जैनाचार्य रत्न सुन्दर सूरीश्वर महाराज ; शरीर संयम के लिए है, सुख भोगने के लिए नहीं
इंदौर. शरीर जब बीमारी से ग्रसित होता है तब हम औषधि केवल लेने के लिए नहीं लेते बल्कि स्वस्थ होने के लिए लेते हैं। पानी पीने के लिए पानी नहीं पीते प्यास बुझाने के लिए पीते हैं तो फि र शरीर को हम सुख भोगने का जरिया क्यों मानते हैं। यह शरीर हर दुख भोगने के लिए नहीं बल्कि इसके माध्यम से हमे संयम को अपनाना चाहिए।
मंगलवार को यह बात आज पद्मभूषण जैनाचार्य रत्न सुन्दर सूरीश्वर महाराज ने स्कीम 71 स्थित अक्षत गार्डन में आयोजित दो दिवसीय प्रवचनमाला के दूसरे दिन कही। उन्होंने कहा हम पैसा कमाने के लिए नहीं कमाते बल्कि प्रसन्नता की अनुभूति के लिए कमाते हैं। शरीर को हमने सुख भोगने का साधन मान लिया है जबकि शरीर का उपयोग संयम के लिए आनंद की अनुभूति के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा भोजन किया पर तृप्ति नहीं हुई। पानी पीया पर प्यास नहीं बुझी, इसी प्रकार संयम लिया पर आनंद नहीं मिला तो फि र ऐसी चीजों के पीछे भागने का क्या औचित्य है। आचार्यश्री ने कहा आगे जाने के आपके वाहन में चार गियर होते हैं लेकिन पीछे लौटने के लिए एक ही गियर रिवर्स होता है। कभी-कभी रिवर्स गियर का इस्तेमाल भी सही जगह पहुंचा देता है। हम अपने व अपने परिवार के लिए साधन जुटाने में ही जीवन खपा रहे हैं। चातुर्मास आयोजन समिति से जुड़े कल्पक गांधी ने बताया कि आचार्यश्री के 5 जून को 'दुख मेरा ही आमंत्रणÓ तथा 6 को 'तोल मोल के बोलÓ विषय पर प्रवचन होंगे। महेश नगर में 7 जून को 'जीने का नया फ ार्मूलाÓ तथा 8 जून को 'सम्बन्धों का टॉप सीक्रेटÓ विषय पर प्रवचन होंगे।
Published on:
05 Jun 2019 07:18 pm
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