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पेंटिंग्स में योग और संगीत का अंतरसंबंध

ललित कला संस्थान में पेंटिंग कॉम्पीटिशन और व्याख्यान

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पेंटिंग्स में योग और संगीत का अंतरसंबंध

इंदौर. विश्व संगीत और योग दिवस के मौके पर शासकीय ललित कला संस्थान में पेंटिंग कॉम्पीटिशन और व्याख्यान का आयोजन किया गया। कॉम्पीटिशन का विषय योग और संगीत का अंतरसंबंध और व्याख्यान का विषय भी यही था। मुख्य वक्ता थे भोपाल से आए सीनियर आर्टिस्ट वसंत भार्गव।
विषय दे दिया गया था इसलिए पार्टिसिपेंट्स के लिए सीमा पहले ही तय हो गई थी और सभी ने इसी विषय पर पेंटिंग्स और ड्रॉइंग्स बनाईं। युवा कलाकारों ने इसी विषय पर काम करते हुए अपनी किएटिविटी और कल्पनाशीलता का परिचय दे ही दिया। ज्यादातर स्टूडेंट्स ने योग की मुद्राओं को ही पेंट किया। साथ में संगीत के सिंबल्स भी चित्रित किए। प्रथम पुरस्कार के विजेता मुकेश विश्वकर्मा ने एक बालिका को योग की मुद्रा में दिखाया, लेकिन उसके एक्सप्रेशंस एेसे थे जैसे वह गा रही हो। ज्योति सिंह ने योग को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ा और बताया कि दिनभर कई तरह के काम करते हुए हम योग की मुद्राओं में होते हैं पर उन पर हमारा ध्यान नहीं जाता। तृतीय पुरस्कार की विजेता एकता शर्मा ने राष्ट्रीयता को योग के साथ जोड़ा। उन्होंने तिरंगे के रंगों के साथ अशोक चक्र तो बनाया, लेकिन चक्र की तीलियों के बीच सूर्य नमस्कार की मुद्रा भी दिखाई। एक स्टूडेंट ने कचरा बीनते बच्चे दिखाए और नीचे लिखा यही इनका योग है और यही संगीत।

सतत साधना मांगती है सरस्वती

स्टूडेंट्स के बीच व्याख्यान देते हुए चित्रकार वसंत भार्गव ने कहा कि युवा कलाकार चित्रकारी सतत रूप से करें क्योंकि कलाओं की देवी सरस्वती तभी वरदान देती है जब उसकी साधना सतत की जाए। इसलिए लगातार कलाकर्म करते रहें। उन्होंने कहा कि संगीत योग और चित्रकला एेसे तत्व हैं जो हमें क्रिएटिविटी की तरफ ले जाते हैं। इस दौर में जब मोबाइल फोन हम सबकी क्रिएटिविटी को खत्म कर रहा है और हमें अनप्रोडक्टिव बना रहा है, तब संगीत, योग और चित्रकला ही हमारी रचनाशीलता को बचा सकती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे आइडीए चेयरमैन शंकर लालवानी। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य अरुण मोरोने ने किया।