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चुनाव में लगे अफसर, जिन कामों का आचार संहिता से लेना-देना ही नहीं, वे भी अटके

चुनाव में लगे अफसर, जिन कामों का आचार संहिता से लेना-देना ही नहीं, वे भी अटके

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इंदौर

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Hussain Ali

Mar 12, 2019

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चुनाव में लगे अफसर, जिन कामों का आचार संहिता से लेना-देना ही नहीं, वे भी अटके

इंदौर. लोकसभा चुनावों के लिए आचार संहिता लगनेे के साथ ही कई विभागों से जिम्मेदार गायब हो गए। कुछ निर्वाचन के कामों में व्यस्त हो गए तो कुछ इसी बहाने ड्यूटी पर नहीं दिखे। कलेक्टोरेट, निगम और यूनिवर्सिटी जैसी जरूरी जगह पर भी लोग आवेदन लेकर यहां वहां भटकते रहे। अफसरों में इस बात को लेकर भी तालमेल नहीं रहा कि आचार संहिता लगने के बाद कौन सी योजनाएं चालू रखना हैं और कौन सी योजनाओं को बंद करना है।

निगम में आचार संहिता के बाद टेंडर की प्रक्रिया रुक गई है। वहीं पहले हो चुके कामों के बिलों का काम शुरू हो गया है। आचार संहिता लगने के डर से पिछले दो दिन अवकाश होने के बाद भी सभी विभाग खुले थे। इस दौरान नगर निगम के अफसरों ने सभी टेंडर के आदेश जारी कर दिए। नगर निगम के सभी विभागों में पुराने कामों के बिलों से जुड़ी फाइलें सोमवार से तेजी से चलने लगी हैं।

आचार संहिता लगते ही उल्लंघन की शिकायतें शुरू

वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूसिंह रघुवंशी ने कांग्रेस सरकार द्वारा किसानों को कर्ज माफी के लिए दिए जा रहे प्रमाण पत्रों पर मुख्यमंंत्री कमलनाथ की तस्वीर होने को लेकर यह शिकायत की है। उनका कहना है, प्रमाण पत्र पर मुख्यमंत्री की तस्वीर लगातार मतदाताओं को प्रभावित कर आचार संहिता का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र के माध्यम से शिकायत की है। उन्होंने तत्काल तस्वीर लगे प्रमाण पत्र के वितरण पर रोक लगाने की मांग की।

थाने पर सन्नाटा, महिला को आवेदन का कहकर टरकाया

आचार संहिता लगने के पहले दिन संयोगितागंज थाने पर तीन महिलाएं शिकायत लेकर पहुंची। एक महिला ने दूसरी की तरफ इशारा करते हुए बताया कि इसे एक महिला परेशान कर रही है। तब पुलिसकर्मी ने कहा कि आवेदन लिखकर लाओ फिर कार्रवाई करेंगे। महिला साथ में पुलिसकर्मी को भेजकर कार्रवाई करने का कहने लगी तो मौजूद पुलिसकर्मी ने आवेदन लाने का कहकर टरका दिया। वे आपस में बातें कर रही थी कि कोई परेशान करे तो पहले क्या आवेदन बनवाने जाएं।

नगर निगम : राशन कार्ड और पेंशन के नए आवेदन रोके, जोनल कार्यालयों को भी भेजे आदेश

आचार संहिता का सबसे ज्यादा असर गरीबी उन्मूलन विभाग पर देखने को मिला। यहां सोमवार को लगभग सन्नाटा ही पसरा हुआ था। नए राशन कार्ड, सहित नए पेंशन आवेदन, और पेंशन से जुड़ी फाइलों को बंद कर उनका रजिस्टर तैयार करने का काम चल रहा था। यहां कई लोग पेंशन और राशन कार्ड के आवेदन लेकर लाइनों में लगे हुए थे और इन्हें सही जानकारी देने वाला कोई नहीं था। लोगों को यह पता ही नहीं था कि आचार संहिता लगने की वजह से इन आवेदनों को लेने पर रोक लगा दी गई है। इस तरह की अव्यवस्था कई अन्य जगहों पर भी देखने को मिली। निगम अधिकारियों का कहना है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पहले आ चुके लोन आवेदनों की लिस्टिंग का काम जारी है। सोमवार से सिर्फ नए आवेदनों पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही सभी जोनल कार्यालयों को भी सोमवार को एक आदेश भेज दिया गया, जिसमें नए आवेदन नहीं लेने के आदेश दिए गए। कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द पुराने प्रकरणों को निपटा दिया जाए ताकि लोगों को परेशानी न हो।

यूनिवर्सिटी : न कर्मचारी मिले न अफसर, परीक्षा फॉर्म हाथ में लेकर सुबह से शाम तक खड़े रहे छात्र

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में भारी अव्यवस्था नजर आई। यूनिवर्सिटी के अफसरों के साथ कई कर्मचारी निर्वाचन की ट्रेनिंग में होने से कई विद्यार्थियों के जरूरी काम भी नहीं हो पाए। दोपहर ढाई बजे परीक्षा नियंत्रक प्रो. अशेष तिवारी के कक्ष के बाहर छठे सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म जमा करने वालों की भीड़ लगी थी। एक-एक अनुमति देने से भीड़ बढ़ती गई और शाम ६ बजे तक सिलसिला जारी रहा। दूसरी ओर रजिस्ट्रार अनिल शर्मा बैठक में हिस्सा लेने भोपाल गए थे। जबकि परीक्षा विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार प्रज्वल खरे भी लंच के बाद यूनिवर्सिटी से चले गए। डिग्री और माइग्रेशन पाने के लिए भी छात्र कर्मचारियों से गुजारिश करते रहे। बीकॉम के छात्र रोहित सैनी ने बताया, तबीयत खराब होने से निर्धारित तारीख तक परीक्षा का फॉर्म जमा नहीं कर पाया था। सोमवार को भी भीड़ के कारण आवेदन नहीं लिया गया। अफसरों से मिलने का मौका भी नहीं मिल पाया। साल खराब होने की नौबत आ गई है। इसी तरह की दिक्कतों के साथ कई छात्र दिनभर परेशान होते रहे।

कलेक्टोरेट : दोपहर बाद एसडीएम ने कहा नहीं जमा होंगे बोरिंग के फॉर्म, पटवारियों को तलाशते रहे लोग

तहसील से एडीएम कार्यालय तक अधिकांश कामों के लिए लोग परेशान होते रहे। राऊ तहसीलदार के कक्ष के बाहर बड़ी संख्या में आवेदक खड़े थे लेकिन अंदर कक्ष में तहसीलदार सुदीप मीणा मौजूद नहीं थे। जानकारी लेने पर स्टाफ द्वारा बताया गया कि साहब आ रहे हैं। सुदामा नगर निवासी देवेंद्र जायसवाल अपने बेटे की परीक्षा में जाति प्रमाण पत्र लगाए जाने के लिए आवेदन लेकर भटकते हुए मिले। पूछने पर बताया कि सुबह 11 बजे से पटवारी की तलाश कर रहे हंै, लेकिन ना तो वे फोन उठा रहे हैं और ना ही कोई सही जानकारी दे रहा है। आचार संहिता के पहले ही दिन अधिकांश पटवारी गायब रहे। लसूडि़या निवासी हरिओम पटेल बोरिंग की अनुमति का आवेदन लेकर समाधान कक्ष पहुंचे, लेकिन आवेदन लेने वाले कर्मचारियों ने इनकार कर दिया। उन्हें संबंधित एसडीएम के पास पहुंचा दिया। कर्मचारियों का कहना था कि एक बजे बाद जूनी इंदौर एसडीएम शाश्वत शर्मा ने आवेदन नहीं लिए जाने के मौखिक निर्देश दे दिए। इसके बाद असमंजस की स्थिति बनी रही।