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Mp election 2023; सावधान! सोशल मीडिया से फेक न्यूज फैलाने का प्लेटफॉर्म हुआ तैयार

अब मोबाइल डाटा खरीद घर-घर तक पहुंचा रहे पोस्ट, ग्रामीणजन ज्यादा टारगेट पर

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Mp election 2023; सावधान! सोशल मीडिया से फेक न्यूज फैलाने का प्लेटफॉर्म हुआ तैयार

Mp election 2023; सावधान! सोशल मीडिया से फेक न्यूज फैलाने का प्लेटफॉर्म हुआ तैयार

विधानसभा चुनाव को लेकर उम्मीदवारों के बीच सोशल मीडिया के जरिए अलग जंग चल रही है। मतदान को अब अंतिम कुछ दिन ही शेष हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का जबरदस्त इस्तेमाल शुरू हो गया है। अधिकांश उम्मीदवारोंं ने माकेर्टिंग एजेंसियों को हायर किया है, उद्देश्य अपनी छवि चमकाने से ज्यादा प्रतिद्वंदी की छवि को दागदार बनाना है। इसके लिए पुरानी घटनाओं से संबंधित एडिटेड फेक वीडियो, फेक न्यूज का प्रसारण तेज हो गया है। फेक वीडियो-न्यूज पहचानने का कोई तरीका सोशल मीडिया पर नहीं है इसलिए फायदा उठाने के लिए नई तकनीक को हथियार बना लिया है।

केंद्रीय मंत्री आए तो एक बड़े नेता का कथित रूप से अपमान हो गया। इससे संबंधित वीडियो वायरल कर दिया गया। अब नेताजी को खुद वीडियो जारी कर सच्चाई बताना पड़ रही है। एक उम्मीदवार का प्रचार को लेकर विवाद हुआ तो उन्होंने चुनौती दे डाली। बस फिर क्या था, विरोधी खेमे ने पुराने विवाद के वीडियो निकालकर एडिट कर वायरल कर दिए। इसके काउंटर में अब यह उम्मीदवार प्रतिद्वंदी के वीडियो व बयान तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों की माने तो लोगों को सच्चाई तत्काल पता नहीं चल पाती है इसलिए वीडियो लोगों को प्रभावित कर जाते हैं। प्रचार के आखिरी दिनों में इसे मुख्य हथियार बनाने वार रूम तैयार है। तकनीकी विशेषज्ञ के साथ फेक तरीके से मजबूत किए गए सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए बड़ी-बड़ी टीमें, इन्फ्लूएंसर वार रूम में लगे हुए हैं।

ऐसा चलता है काम

उम्मीदवार जिस मार्केटिंग एजेंसी को हायर करता है उसके लोग प्रतिद्वंदी को ट्रैक करते हैं। वह कहां जा रहा है, क्या बोल रहा, कहीं जुबान फिसली तो तुरंत वीडियो बन जाता है।

- वार रूम में बैठी टीम वीडियो को एडिट कर विवादास्पद बनाती है। एडिट वीडियो की रील, मीम्स बना दिए जाते हैं।

- जुबान फिसली तो उसे मुद्दा बनाकर अपने उम्मीदवार के बयान के साथ वायरल करते हैं।

- सोशल मीडिया पर एक-डेढ़ साल पहले बने पेज को फेक व्यूज, लाइक के जरिए प्रभावी बनाया जाता है। एजेंसी इन्हें खरीदकर फेक वीडियो वायरल करती है, लोग विश्वास कर लेते हैं।

- कई इन्फ्लूएंसर के पेज भी खरीद लिए गए हैं, उनके समर्थक तक फेक वीडियो, न्यूज प्रसारित कर दी जाती है। अंतिम दिनों में ज्यादा होता है। सच्चाई सामने आ नहीं पाती और वोट मिल जाते हैं।

एक घर में कितने मोबाइल नंबर, सभी खुले बाजार में बिक रहे

उम्मीदवारों के रिकॉर्डेड कॉल, प्रचार के मैसेज इन दिनों हर शहर के लोगों तक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, पिन कोड व जिले के आधार पर बल्क में डाटा बेचा जा रहा है। मोबाइल कंपनी से जुड़े लोग, सर्वे एजेंसी, बैंक का डाटा 10 से 20 हजार में बिक रहा है। एक घर में कितने मोबाइल नंबर हैं, सभी का डाटा बाजार में उपलब्ध है जिसका इस्तेमाल एजेंसी कर रही है। इसी के जरिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर बल्क में कॉल, मैसेज, रील भेजकर प्रचार के साथ गुमराह करने का काम चल रहा है।

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एक्सपर्ट व्यू

जसकरनसिंह मनोचा, डिजिटल स्ट्रेटेजिस्ट

फेक न्यूज लोगों का दिमाग हैक करने का बड़ा हथियार

फेक न्यूज लोगों के दिमाग को हैक का बड़ा हथियार बन गया है। किसी के वीडियो के अंश लेकर रील वायरल की जाती है। ग्रामीणजन ज्यादा टारगेट पर रहते हैं। इसमें आधुनिक तकनीक एआइ (आटिज़्फिश्यिल इंटेलीजेंस) का भी दुरुपयोग हो रहा है। इसके लिए कई सोशल मीडिया वार रूम काम कर रहे हैं। सारा डाटा बाजार में पिन कोड व जिले का हिसाब से बिक रहा है। सोशल मीडिया पर अस्तित्व में नहीं आने वाली बातें प्रचारित की जाती हैं। फेक न्यूज की जांच का कोई आधार नहीं है इसलिए सावधान रहना चाहिए।