
महिलाओं की जान से मेडिकल स्टोर संचालक कर रहे खिलवाड़
भूपेंद्र सिंह . इंदौर.
शहर के कई मेडिकल संचालक पैसों के लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहे। इन दुकानों से डॉक्टर की पर्ची के बगैर ही गर्भपात की गोलियां बेची जा रही हैं। इन गोलियों के दाम भी मनमाने वसूले जाते हैं। अगर महंगी गोली न लेना हो तो आयुर्वेदिक दवा का विकल्प भी बताते हैं।
दवाइयों के विक्रय को लेकर शहर में विचित्र स्थिति है। गर्भपात की दवाई हो या नशीली गोलियां, इन्हें डॉक्टर की पर्ची के बिना बेचना प्रतिबंधित है, लेकिन फिर भी दुकानों पर सहजता से मिल रही हैं। चंदन नगर, बाणगंगा, गौरीनगर, देवास नाका क्षेत्र में कई दुकानें ऐसी हैं, जहां इन दवाइयों को बिना पर्ची के खरीदा जा सकता है। प्रशासन ने इसकी खरीदी-बिक्री रोकने के लिए धारा 144 लागू कर रखी है, फिर भी कोई इसका पालन नहीं करता। पत्रिका एक्सपोज ने स्टिंग से इस धंधे का खुलासा किया, जिसमें मनमाने दाम पर ये दवाइयां बेची जा रही हैं।
सतर्क रहें महिलाएं
बगैर चिकित्सकीय परामर्श के गर्भपात की गोलियां लेना महिला के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। गर्भ कितने हफ्ते का है, सोनाग्राफी में प्रेगनेंसी फैलोपियन ट््यूब में तो नहीं है, इत्यादि बातों का ध्यान डॉक्टर रखते हैं। सावधानी नहीं रखें तो महिला शॉक में भी जा सकती है।
डॉ. ज्योति सिमलोट, महिला रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
पैसे दो, बुक कर दो दवाई
इंदौर. शहर में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मेडिकल स्टोर संचालक बेखौफ गर्भपात की गोलियां बेच रहे हैं। एक्सपोज ने स्टिंग में चंदन नगर चौराहा स्थित आलिया मेडिकल के संचालक से बिना पर्ची दवाई मांगी तो वह देने को तैयार हो गया, पर उसने दाम बहुत अधिक मांगे। दुकानदार के पास कई तरह की गोलियां उपलब्ध थीं।
यह हैं नियम
ये दवाएं 6-7 माह तक की गर्भावस्था में डॉक्टर के निर्देशन में ही दी जा सकती हैं। ऐसी दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों को पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अपना पंजीयन कलेक्टर कार्यालय में करवाना आवश्यक है। जिस महिला को दवाई दी गई है, उसका पूरा विवरण रजिस्टर में लिखा जाता है। पूरी जानकारी कलेक्टोरेट के पोर्टल पर भी डालने का नियम है।
बगैर पर्ची के नशीली व गर्भपात की दवाइयों की बिक्री को लेकर शहर में धारा 144 लागू है। इसका उल्लंघन करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। अगर कोई इसकी बिक्री कर रहा है तो उस पर कार्रवाई करेंगे।
अजयदेव शर्मा, एडीएम
रिपोर्टर- गर्भपात की दवाई या किट मिलेगी क्या?
दुकानदार- नहीं है भैया।
रिपोर्टर- मुझे किसी ने बताया था कि आपकी दुकान पर मिल जाएगी।
दुुकानदार- किसने बताया था?
रिपोर्टर- एक आशा कार्यकर्ता ने।
दुकानदार- ठीक है, आपका नंबर दे जाओ, शाम तक मिल जाएगी।
रिपोर्टर- अभी दे दो, हो तो?
दुकानदार- अभी मामू (दुकान मालिक) नहीं हैं, वह आएंगे, तब देंगे।
(जब रिपोर्टर जाने लगा तो दुकानदार ने इशारा करके बुलाया)
दुकानदार- आप पैसे जमा कर दो, आधे घंटे बाद आकर ले जाना।
रिपोर्टर- कितने रुपए जमा करने होंगे?
दुकानदार- 450 रुपए।
रिपोर्टर- ज्यादा हो जाएंगे, एमआरपी कितनी है?
दुकानदार- एमआरपी की बात छोड़ो, मिल रही है वही बहुत है, 400 रुपए दे देना, हमको भी आगे से महंगी मिल रही है।
रिपोर्टर- दूसरी कम वाली नहीं है क्या?
दुकानदार- आती है। 60 रुपए के 6 आयुर्वेदिक कैप्सूल आएंगे, वैसे कितना टाइम हो गया है?
रिपोर्टर- लगभग 1 महीना हो गया है।
दुकानदार- फिर तो किट ही लेना पड़ेगी। वैसे गोली लेकर देख लो एक बार।
रिपोर्टर - लाओ दे दो।
(दुकानदार ने पैसे लेकर कुछ दवाइयां दे दीं)
Published on:
25 Jan 2018 06:30 pm
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