
ukraine-russia war : युद्ध की 'चपेट' में हमारे उद्योग, केमिकल, मेटल और प्लास्टिक की कीमतों में दो गुना इजाफा
ukraine-russia war विकास मिश्रा, इंदौर
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध का बुरा असर हमारे उद्योग जगत पर पड़ रहा है। दोनों देशों से आने वाले विभिन्न उद्योगों के कच्चे माल की कीमतों में दो फीसदी तक का इजाफा पिछले एक पखवाड़े में हो गया है। लगातार बढ़ती कीमतों के चलते स्थानीय उद्योगों ने अपने ऑर्डर रोक दिए हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही उनकी कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में उत्पादन में भी कमी की आशंका है। सबसे अधिक असर मेटल, केमिकल और प्लास्टिक की कीमतों पर पड़ा है। इसके अलावा क्रूड के रेट बढऩे के कारण शिपिंग कंपनियों ने माल भाढ़े में 15 से 20 फीसदी तक का इजाफा हो गया है।
बाजार की अस्थिरता से बिगड़ा 'मेटल'
मेटल से जुड़ा उद्योग चलाने वाले योगेश मेहता ने बताया, युद्ध के कारण शेयर बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुई है। मेटल के भाव उसी आधार पर तय होते हैं। यूक्रेन से बड़ी मात्रा में उद्योगों में लगने वाले सोडियम नाइट्रेट का आयात होता है, 20 दिन पहले तक उसकी कीमत करीब 35 रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर करीब 140 रुपए किलो तक पहुंच गया है। एल्युमिमियम की कीमत 100 रुपए किलो से बढ़कर 300 रुपए किलो तक पहुंंच गई है। स्टील उद्योग में काम में आने वाले क्रोम के दाम बी 200 रुपए किलो से बढ़कर 300 रुपए तक पहुंच गए हैं। लोहे के दाम भी 45 से बढ़कर 65 रुपए किलो हो गए हैं। कॉपर के दाम भी 500 रुपए किलो से बढ़कर 700 तक पहुंच गए हैं।
केमिकल में लगी 'आग'
उद्योगपति तरुण व्यास ने बताया केमिकल के दामों में भी 15 से 20 फीसदी तक का इजापा हो गया है। अधिकांश केमिकल यूरोप से आता है। सर्फ, साबुन बनाने सहित लगभग सभी उद्योगों में अलग-अलग तरह के केमिकल की जरुरत होती है। सोडा एश जो पिछले महीने तक 38 रुपए था वह अब 50 रुपए पर पहुंच गया है। कॉस्टिक सोडे की कीमत 75 से 100 रुपए किलो हो गई है। एओएस भी 45 से 60 रुपए किलो पर है। लाब्सा की कीमत भी 113 से 130 रुपए किलो पर पहुंच गई। डोलोमाइट पॉवडर में दोगुनी उछाल है। सल्फ्यूरिक एसिड के भाव में दो गुना की बढ़ोतरी हुई है। सोडियम नाइट्राइड की कीमत 35 से 140 रुपए किलो हो गई है।
प्लास्टिक भी 20 प्रतिशत तक बढ़ा
रूप से बड़ी मात्रा में प्लास्टि का कच्चा माल आता है। प्लास्टिक के रॉ मटेरिलय (दाने) की कीमत में पिछले एक महीने में करीब 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। उद्योगपित अनिल पालीवाल ने बताया 110 से 115 रुपए किलो की कीमत इन दिनों 135 से 140 तक पहुंच गई है। पुरानी कीमतों के आधार पर लिए गए ऑर्डर पूरे करने में अब घाटा उठाना पड़ेगा। प्लास्टिक दानों से विभिन्न तरह के उत्पादन बनाए जाते हैं। मप्र में प्लास्टिक उद्योग का हब इंदौर संभाग है। यहां से प्लास्टिक की छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 6 हजार इंडस्ट्री है जो हर महीने करीब 1200 करोड़ का टर्न ओवर करती हैैं।
यूरोप है शिपिंग कंपनी का हब
एआईएमपी के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया ने बताया, पूरी दुनिया में यूरोप शिपिंग का हब है। रूस और यूक्रेन में युद्ध से देश भर में माल सप्लाय करने वाली शिपिंग कंपनियों पर असर हुआ है। क्रूड के दाम बढऩे से किराए में इजाफा कर दिया गया है। इससे आयात और निर्यात दोनों पर असर हो रहा है। कुछ देशों से तो शिपिंग फिलहाल बंद है। इसका असर कुछ दिन बाद और अधिक दिखाई देगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 20 फीसदी किराए में बढ़ोतरी हुी है। कोरोना के चलते कंटेनर्स की कमी की समस्या पहले से ही थी।
Published on:
28 Feb 2022 04:17 pm
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