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पीडब्ल्यूडी के रिश्वतखोर अधिकारियों से परेशान ठेकेदार ने की आत्महत्या, सुसाइड लेटर में लिखे कई बड़े नाम

सूदखोर और अफसरों से परेशान ठेकेदार प्रकाश पिता मोहनलाल परिहार निवासी स्कीम ९४ ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली।

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इंदौर. सूदखोर और अफसरों से परेशान ठेकेदार प्रकाश पिता मोहनलाल परिहार निवासी स्कीम 94 ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। उसने गुजरात के अंबाजी से पत्नी को आखिरी बार फोन किया और फिर होटल के कमरे में जहर खा लिया। अंबाजी पुलिस ने परिजन को सूचना दी तो परिवार उसे यहां लेकर आया और निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। मंगलवार रात उसने दम तोड़ दिया। सुसाइड नोट में ठेकदार ने सूदखोर और पीडब्ल्यूडी अफसरों से परेशान हो जान देने की बात लिखी है।

मामा संतोष मुकाती ने बताया, प्रकाश अकसर अंबाजी दर्शन के लिए जाता था। ८ सितंबर को अंबाजी स्थित होटल से पत्नी भावना को वीडियो कॉल कर सूदखोर और पीडब्ल्यूडी अफसर से परेशान होकर जान देने की बात कही थी तो उन्होंने समझाइश दी। इतनी बात होते ही उसका फोन बंद हो गया। कुछ घंटे बाद अंबाजी पुलिस ने प्रकाश के भर्ती होने की जानकारी दी। भंवरकुआं टीआई शिवपाल सिंह कुशवाह बोले, घटना गुजरात की है। परिजन प्रकाश को उपचार के लिए इंदौर लाए थे। शव का पीएम करवाकर जीरो पर मर्ग कायम किया। आगे की जांच गुजरात पुलिस करेगी। संभवत: आबू पुलिस ने सुसाइड नोट को रिकॉर्ड पर लिया हो।

पापाजी इनसे कहना मेरी लाश से रुपए वसूल लें
आबू पुलिस को मिले सुसाइड नोट में प्रकाश ने किसी प्रवीण को झाबुआ में आंगनवाड़ी बिल्डिंग बनाने के लिए लाखों रुपए देने व ४५ लाख रुपए की धोखाधड़ी की बात लिखी है। उसने लिखा है, पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर राजेश जाधव, एसडीओ भिड़े और सब इंजीनियर चौहान प्रति आंगनवाड़ी १ लाख रुपए रिश्वत मांग रहे हैं। प्रकाश ने सुसाइड नोट में दिनेश गुप्ता, विकास लांबा, अमित शर्मा, राजेश पांडे, डोस, खंडेलवाल, प्रवीण जैन, मिलिंद कुलकर्णी, बबलू शाह, अजीत जैन और शरद मंगल नामक व्यापारी से व्यापार के लिए रुपए उधार लेने की बात लिखी है। उसने नोट में इन पर तीन गुना ब्याज वसूलने के बाद भी परेशान करने का आरोप लगाया है। प्रकाश ने सुसाइड नोट में माता-पिता, पत्नी भावना, बच्चे मिताली, दिव्यांश और यश को संबोधित करते हुए लिखा, 'आप सब लोगों से मैं बहुत प्यार करता हूं। इस उम्र में आप सभी को छोड़कर जा रहा हूं, क्या करूं? पापाजी ये सब लोग मुझ पर इतना दबाब डाल रहे हैं कि जान देने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा। अब इन सब से कहना की मेरी लाश से रुपए वसूल कर सकें तो कर लें.