
rajput samaj indore
इंदौर।
राजपूत समाज की नाराजी से लोकसभा का समीकरण गड़बड़़ा सकता है। दोनों ही दलों के द्वारा हो रही उपेक्षा से समाज के बड़े धड़े ने तय किया है कि वे चुनाव में अपनी ताकत का अहसास करवाएंगे। इसको लेकर कल एक बड़ी बैठक भी हुई, जिसमें अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश, संभाग और नगर पदाधिकारी शामिल हुए।
राजपूत समाज के मतदाता राजनीतिक पार्टियों के रवैये से नाखुश हैं। कल हुई बैठक में महासभा के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह गौतम ने कहा कि समाज के लिए दलों का रवैया काफी लचर रहा। समाज को प्रतिनिधित्व देना तो दूर, भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी समाज के मतदाताओं की अनदेखी कर रहे हैं। समाज ने दो नंबर विधानसभा में ताकत दिखाई थी, तो यहां भाजपा की लीड आधी हो गई। अब राजनीतिक पार्टियों या शासन के किसी भी संस्थान द्वारा समाज को लेकर भ्रांति फैलाई जाती है या उपेक्षा की जाती है, तो समाज उसका बहिष्कार करेगा। राजनीतिक दृष्टिकोण की पारंपरिक व्यवस्था को खत्म किया जाएगा। उनकी अनदेखी करके कोई भी दल या पार्टी जीत नहीं सकती। बैठक में प्रदेश प्रवक्ता पंकज सिंह, संभागीय अध्यक्ष समरेंद्र सिंह चौहान सहित कई वरिष्ठजन मौजूद थे।
नहीं बुलाया था भाजपा की बैठक में
पिछले दिनों भाजपा ने शहर के सभी समाजों की बैठक ली थी। इसमें महाराष्ट्रीयन, सिंधी, गुजराती, ब्राह्मण, वैश्य सहित सभी समाजों को बुलाया गया था, लेकिन राजपूत समाज को नहीं। इसको लेकर भी समाज खासा नाराज है और गौतम ने कहा कि इससे भाजपा की यह मानसिकता भी प्रकट होती है कि उसे राजपूत समाज की जरूरत नहीं है। ऐसे में अब समाज अपने लिए लड़ेगा।
इंदौर में ऐसा सामाजिक गणित
इंदौर में वोटर्स के गणित की बात करें तो अन्य प्रमुख समाजों से राजपूत समाज के वोट काफी ज्यादा हैं। गौतम का कहना है कि जिले में राजपूत समाज के साढ़े चार लाख वोटर्स हैं, जिसमें दो लाख ग्रामीण क्षेत्र में और ढाई लाख शहरी क्षेत्र में हैं। अन्य समाजों की बात करें तो सिंधी समाज के 60 हजार, मराठी समाज के डेढ़ लाख, ब्राह्मण तीन लाख से ऊपर, वैश्य तकरीबन एक लाख, गुजराती 35 हजार, मुस्लिम ढाई लाख और शेष अन्य समाजों के हैं। ऐसे में राजपूत समाज ही है, जो परिणाम की दशा और दिशा तय करता है।
Published on:
02 May 2019 11:10 am
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