19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भू स्वामी नहीं कब्जेदार के रूप में रिकार्ड में दर्ज है रणजीत हनुमान मंदिर

- प्रशासन ने शुरु की कवायद - राजस्व अभिलेखों में रणजीत हनुमान मंदिर कलेक्टर के रूप में होंगे दर्ज

2 min read
Google source verification

इंदौर

image

Amit Mandloi

May 22, 2018

news bulletin

भू स्वामी नहीं कब्जेदार के रूप में रिकार्ड में दर्ज है रणजीत हनुमान मंदिर

इंदौर. रणजीत हनुमानमंदिर के व्यवस्थापक कलेक्टर हैं, लेकिन राजस्व दस्तावेजों में जमीन के भू स्वामी रणजीत हनुमान मंदिर नजर नहीं आते है। अब उन्हे राजस्व अभिलेखों में भू स्वामी के रूप में दर्ज किया जाने की कवायद शुरू हो गई है। जांच पड़ताल कर तहसीलदार ने फाइल तैयार कर कलेक्टर के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजी है। कलेक्टर की हां होती ही राजस्व रिकार्ड में रणजीत हनुमान मंदिर कलेक्टर के नाम हो जाएगा।

दरअसल, धर्मस्व विभाग की ओर से जिले के तहत आने वाले प्राचीन मंदिरों की भूमि स्वामी के रूप में कलेक्टर को व्यवस्थापक के रूप में दर्ज किया है। इंदौर जिले में वैसे तो एेसे मंदिरों की संख्या बड़ी तादात में है, लेकिन शहर में स्थिति तीन मंदिर जो आस्था के केंद्र बिंदु भी है। माता बिजासन मंदिर, रणजीत हनुमान मंदिर और प्राचीन गणेश खजराना मंदिर इनके व्यवस्थापक कलेक्टर हैं और इन मंदिरों को सौंदर्यीकरण से लेकर विकास की पूरी बागडोर प्रशासन के हाथों में है। कलेक्टर निशांत वरवड़े ने तीनों मंदिरों का प्रशासक की जिम्मेदारी आइडीए सीईओ गौतम सिंह को सौंप रखी हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रशासन से राजस्व दस्तावेजों में भी रणजीत हनुमान मंदिर कलेक्टर दर्ज किए जाने की बात रखी गई। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने दस्तावेजों को खंगाला। जिसमें सामने आया कि यहां पर रणजीत हनुमान मंदिर कब्जेदार के रूप में दर्ज है।
कलेक्टर के निर्देश पर ही होगा दर्ज-

इधर, जांच पड़ताल करने वाले अधिकारी और पीछे के रिकार्ड खंगाले तो १९२५ के दस्तावेजों में उक्त जमीन मिलेट्री तोपखाना के रूप में दर्ज है। रणजीत हनुमान मंदिर साल १९७० से कब्जाधारी के रूप में दर्ज है। रणजीत हनुमान मंदिर की सर्वे नंबर ५१६/३ ग्राम सिरपुर रकबा ०.२६३ हेक्टेयर है।
अभियान चला था, लेकिन रह गए रणजीत-

प्रदेश में प्राचीन मंदिरों की जमीनों को राजस्व रिकार्ड में व्यवस्थापक के रूप में कलेक्टर दर्ज किए जाने का अभियान चला था। यह अभियान ९० के दशक में चला था, लेकिन उस दौरान रणजीत हनुमान मंदिर का नाम उक्त जमीन पर दर्ज नहीं हो पाया था। हालांकि १९७० में कब्जेदार के रूप में रिकार्ड में रणजीत हनुमान मंदिर कैसे आया यह भी स्पष्ट नहीं है।
इनका कहना है-

जांच रिपोर्ट मिली है। उक्त फाइल अनुमोदन के लिए कलेक्टर के समक्ष रखी जा रही है। उनके निर्देशानुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राकेश शर्मा

एसडीएम, मल्हारगंज