
FATHERS DAY SPECIAL- 'म्हारा छोरा-छोरी भी किसी से कम हैं के..!'
मनीष यादव @ इंदौर.
हम महावीर सिंह फोगाट और उनकी बेटियों की रील और रीयल लाइफ दोनों से अच्छी तरह से परिचित हैं। एक पिता ने मासूम बच्चों को पहलवान बनाकर गांव की मिट्टी से लेकर विदेशों तक पहुंचा दिया। उनके जैसी ही एक कहानी इंदौर की है। अंत सिर्फ बेटियों का है। इसमें एक बेटा और बेटी है। बाकी पिता और उनकी वही सख्ती और जुनून।
हम बात कर रहे हैं देपालपुर निवासी अनिल सिंह राठौर और उनके दोनों बच्चे हंसा बेन उर्फ माही राठौर और बेटे महेश की। अनिल के मुताबिक वह भी पहलवान बनना चाहते थे, लेकिन कुछ कर नहीं पाए। इस पर उन्होंने अपना सपना बच्चों में पूरा करने की सोची। उन्हें कुश्ती के गुर सिखाना शुरू कर दिए। आज दोनों ही राष्ट्रीय स्तर ट्रेनिंग ले रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुके हैं।
8 और 10 साल की उम्र से ट्रेनिंग
अनिल ने बताया कि जब दोनों बच्चों की ट्रेनिंग शुरू हुई तो माही 10 और महेश की उम्र आठ साल थी। पहले उन्हें दंगल में लेकर गए ताकि उनके मन में कुश्ती को लेकर रुचि जागे। इसके बाद उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई। सुबह 4 बजे उठाते और फिर कसरत शुरू हो जाती। कुछ दिन कसरत कराने के बाद कुश्ती के दांव-पेंच सिखाना शुरू किया गया।
भूसे के ढेर पर ट्रेनिंग
गांव में मेट नहीं होने के कारण ट्रेनिंग में परेशानी आ रही थी। इसके चलते भूसे पर चादर डाल कर मेट तैयार किए। अपने बच्चों के साथ ही दूसरे बच्चों को भी ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। आज गांव के कई बच्चे कुश्ती में महारत हासिल कर चुके हैं।
घर में ही होने लगा विरोध
बच्चों के साथ में शुरुआत में सख्ती करना पड़ी। वे दूध नहीं पीते थे। जोर देने पर उल्टी कर देते। इस पर वे उन्हें उठाते और अपने सामने दूध पीने को कहते। अनिल बताते हैं कि बच्चों से सख्ती का उनके पिता ने विरोध किया। वे इतनी सख्ती नहीं करना चाहते थे। बेटी को सिखाया तो यह कहा गया कि लड़की है, इसको कुश्ती क्यों सिखा रहे हो। इसके बाद भी वे दोनों को ट्रेनिंग देते रहे। आज दोनों ही नेशनल के साथ विदेशों में प्रतियोगिता खेल चुके हैं। अभी खेल अकादमी में आगे की ट्रेनिंग ले रहे हैं ।
Updated on:
19 Jun 2022 11:47 am
Published on:
19 Jun 2022 11:46 am
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