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साढ़े चार हजार वर्गफीट पर भी खुल जाएगा पेट्रोल पंप

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागत कम करने के लिए आरडीसी ने बदले मापदंड

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petrol pump

इंदौर।
ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंप खोलने के लिए ज्यादा बड़ी जमीन नहीं चाहिए होगी। यहां साढ़े चार हजार वर्गफीट का प्लॉट होगा तो भी पेट्रोल पंप खोला जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पंप की लागत कम करने और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आरडीसी ने पेट्रोल पंप के मापदंडों को शिथिल कर दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी पेट्रोल पंप के लिए जितनी जमीन चाहिए, उसके लिए दो नियम लागू हैं। पहला बिना डिवाइडर वाली सड़कों के लिए है, जिसमें भूखंड का आकार 35 बाय 35 मीटर होना चाहिए। दूसरा डिवाइडर वाली रोड के लिए है, जिसमें आकार 35 बाय 45 मीटर होना चाहिए। इसमें 35 मीटर अग्रहिस्सा है। अब इसे बदल दिया गया है। किसी भी तरह की सड़क हो, भूखंड का आकार 20 बाय 20 मीटर है तो भी पंप खोला जा सकेगा। मापदंड बदलने के पहले भूखंड का न्यूनतम आकार 13584 और १७४६५ वर्गफीट चाहिए होता था। अब साढ़े चार हजार वर्गफीट में ही काम हो जाएगा। नए नियम लागू हो गए हैं और अब पेट्रोल पंप के लिए लाईसेंस इन्हीं के अनुसार जारी होंगे।
चौराहों से दूरी भी घटाई
ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर पडऩे वाले चौराहे या सड़क कटाव से पंपों की दूरी के नियम में भी बदलाव किया गया है। नए नियमों के अनुसार स्टेट हाईव (एसएच) के लिए दूरी आधी और मुख्य जिला मार्ग (एमडीआर) के लिए 30 फीसदी कर दिया गया है। एसएच को एनएच या एसएच काटती है तो उस चौराहे से पंप की दूरी एक हजार के बजाय पांच सौ मीटर होगी। वहीं एसएच या एमडीआर को एनएच, एसएच या एमडीआर काटती हैं तो यह दूरी तीन सौ मीटर होगी।
टोल या रेल क्रासिंग के ज्यादा नजदीक
टोल या रेलवे क्रासिंग के ज्यादा नजदीक पंप खुल सकेंगे। मौजूदा नियमों में टोल प्लाजा, रेलवे क्रासिंग या चेक बैरियर से पंप की दूरी एक हजार मीटर होना चाहिए। नए नियम में शहरी क्षेत्रों में तीन सौ मीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में पांच सौ मीटर ही पर्याप्त होगी।
आईल कंपनियों ने की थी मांग
एमपी-आरडीसी के सामने आईल कंपनियों ने प्रेजेंटेशन दिया था, जिसमें उनकी तरफ से कहा गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंप कम लागत मॉडल पर स्थापित किए जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिल सकें। पर मौजूदा मापदंडों के कारण इन पंपों की व्यवहारिकता पर प्रभाव पड़ रहा है। आरडीसी ने विचार करने के बाद मापदंडों में ढील देने का फैसला किया। इसको लेकर सर्कुलर जारी कर दिया गया है।