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महिला के चेहरे पर ‘रसेल वाइपर’ ने डंसा, शरीर के महत्वपूर्ण अंग बंद, डॉक्टर बोले- दुनिया का पहला मामला

बडऩगर में हुआ हादसा, हो गया पल्मोनेरी हेमरेज तीन सप्ताह के इलाज के बाद बची जान

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इंदौर

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Hussain Ali

Dec 24, 2019

महिला के चेहरे पर ‘रसेल वाइपर’ ने डंसा, शरीर के महत्वपूर्ण अंग बंद, डॉक्टर बोले- दुनिया का पहला मामला

महिला के चेहरे पर ‘रसेल वाइपर’ ने डंसा, शरीर के महत्वपूर्ण अंग बंद, डॉक्टर बोले- दुनिया का पहला मामला

इंदौर. बडऩगर निवासी महिला को रसेल वाइपर सांप ने चेहरे पर काट लिया। तीन सप्ताह तक इलाज के बाद जान बचा ली गई। इलाज करने वाले डॉक्टर का दावा है, यह मामला दुनिया में पहला जटिल केस है।

डॉ. सुरेश खटोड़ ने बताया कि गत दिनों ग्राम खेरवास (धार) की 30 वर्षीय रेखा को खेत में काम करते वक्त कमर पर चढक़र सांप ने गाल पर दंश मार दिया था। परिजन झाड़ फूंक कराने के बाद उसे बडऩगर स्थित अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक करीब चार घंटे बीत चुके थे। हाथ-पैर के मुकाबले चेहरे पर काटने से जहर तेजी से फैलता है। इस प्रजाति के सांप बेहद सुस्त होते हैं, अमूमन पैर पर ही काटते हैं। इस कारण महिला की हालत तेजी से बिगड़ी। पल्मोनेरी हेमरेज होने से महिला के महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

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सांस नली के नीचे लगाया वेंटिलेटर

मुंह से रक्त स्त्राव और सांस नली फूलने के कारण वेंटिलेटर पर नहीं रखा जा रहा था। ऑपरेशन कर सांस नली के नीचे वेंटिलेटर लगाया गया। 24 घंटे में दिए जाने वाले 30 वायल का डोज दो घंटे में दिया गया। इसके बाद तीन सप्ताह चले इलाज के बाद महिला की जान बचाई जा सकी। अमूमन सांप काटने के मामले में दो-तीन दिन में मरीज को छुट्टी मिल जाती है। यह मामला अनूठा इसलिए है, क्योंकि सर्पदंश से पल्मोनरी हेमरेज होने का एक मामला श्रीलंका में वर्ष 2015 में सामने आया था। युवक के पैर में रसेल वाइपर ने काटा था, 10 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी। इलाज में डॉ. खटोड़ के साथ डॉ. विनीता खटोड़, डॉ. अशोक चौहान, डॉ. केपी शिवहरे, डॉ. प्रकाश मिश्रा का सहयोग दिया।

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दुनिया की आधी मौत भारत में, फिर भी गंभीर नहीं

डॉ. खटोड़ 25 साल में पांच हजार सर्पदंश के मामलों में मरीजों की जान बचा चुके हैं। उन्होंने कहा, विश्व में हर साल एक लाख लोगों की सांप के काटने से मौत होती है, इनमें से 50 हजार मौत भारत में होती हैं। इसके बावजूद लोग और सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं है। सांप के प्रकार, जहर की मात्रा और मरीज के लक्षण पर ही इलाज संभव है। वह स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को ट्रेनिंग के लिए पहल करने का कह चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अंधविश्वास के चलते पहले झाडफ़ंूक कराने जाते हैं। मेरे पास आने वाले ९० फीसदी मामलों में मरीज वहां ठीक नहीं होने पर आते हैं। असल में ९० फीसदी सांप जहरीले नहीं या कम जहरीले होते हैं, इस कारण ऐसे मामलों में झाडफ़ंूक के बाद ठीक होने का दावा किया जाता है।