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Russia-Ukraine war : कीव में भारी बमबारी, फंसे भारतीय छात्र बोले पता नहीं जिंदा बचेंगे की भी नहीं

Russia-Ukraine war effect : होस्टल में घुसे सैनिक तो डर के मारे दुबके भारतीय, सरकार से मदद की लगाई गुहार

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Russia-Ukraine war : कीव में भारी बमबारी, फंसे भारतीय छात्र बोले पता नहीं जिंदा बचेंगे की भी नहीं

Russia-Ukraine war : कीव में भारी बमबारी, फंसे भारतीय छात्र बोले पता नहीं जिंदा बचेंगे की भी नहीं

इंदौर. हम यूक्रेन के कीव शहर में फंसे हैं। यह शहर युद्ध का मुख्य केंद्र है। हमारे हॉस्टल के बाहर फायरिंग भी हुई है। पता नहीं कब मिसाइल हमारे ऊपर आकर गिर जाए। भारत सरकार उन्हीं लोगों को स्वदेश ला रही है, जो बॉर्डर पर हैं। कीव में फंसे लोगों की सुध नहीं ली जा रही है। दूतावास से संपर्क किया तो वहां से जवाब मिला कि एक हफ्ते तक कुछ नहीं हो सकता है। हम यहां पढ़ाई के लिए आए थे, लेकिन फंस गए हैं। हमारे पास भोजन के लिए भी कुछ नहीं है। कीव में 200 से ज्यादा भारतीय फंसे हैं। हॉस्टल के आसपास बमबारी हो रही है। हमारे सामने मरने की स्थिति बनी हुई है। हमें नहीं पता कि हम अपने देश जिंदा जा सकेंगे या नहीं।

यह कहना है, मेडिकल के उन विद्यार्थियों का, जो Russia-Ukraine war में कीव शहर में फंसे हैं। पत्रिका को भेजे वीडियो संदेश में विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा साझा की है। इसमें एरोड्रम क्षेत्र की प्रतिष्ठी शर्मा भी हैं। प्रतिष्ठिी के पिता डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि बेटी के साथ सभी बच्चे मध्यप्रदेश से हैं। सरकार को उन क्षेत्रों से विद्यार्थियों को पहले निकालना चाहिए, जहां युद्ध के हालात हैं। देखा जा रहा है कि सुरक्षित स्थानों से विद्यार्थियों को लाया जा रहा है। कीव शहर को प्राथमिकता में रखना चाहिए। विद्यार्थियों ने वीडियो संदेश में मुश्किलों के बारे में बताया।

गन लेकर हॉस्टल में घुसे दो जवान
शनिवार को जवान गन लेकर हमारे रूम तक घुस गए। हमें ये भी पता नहीं कि वे रशियन हैं या यूक्रेन के हैं। उन्होंने सब कमरों में देखा कि कहां-क्या चल रहा है। ऊपर जाकर कुछ टैग हटाए या लगाए, पता नहीं इसका क्या मतलब है। इसका मतलब कहीं ये तो नहीं कि यहां अटैक होगा। हमारे पास ये भी मैसेज आया है कि जियो टैङ्क्षगग होगा मतलब मिसाइल अटैक होगा। हमारे हॉस्टल के गेट तोड़ दिए गए हैं। सुरक्षा के लिए भी कोई नहीं है।

आसपास हो रही फायरिंग
यूक्रेन के कुछ हॉस्टल के बाहर रशियन जवानों से लडऩे के लिए गनधारी खड़े हैं, कब-क्या होगा पता नहीं। दिन में कुछ नहीं होता, रात में खतरा ज्यादा होता है। हमारे कैंपस में ही दूसरा हॉस्टल है, वहां शनिवार को खूब फायरिंग हुई है। एेसी स्थिति हमारे नजदीक मेट्रो स्टेशन की भी है। फायरिंग हुई तो हमारी जान जा सकती है।

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