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saikal wali chai: इस शहर की सड़कों पर छा गई ‘सायकिल वाली चाय’

एमबीए चाय वाले के बाद अब 'सायकिल चाय वाली' हुई फेमस...। इंजीनियरिंग और एमबीए किया, सायकिल पर चाय बेचकर कमाया नाम...>

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इंदौर

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Manish Geete

Dec 30, 2022

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इंदौर। बेरोजगारी के भीषण दौर में नौकरी मिलने का इंतजार करना बेमानी है, इसी बात की मिसाल है शहर का अजय खन्ना जो इन दिनों साइकिल वाली चाय के नाम से लोकप्रिय हो रहा है। सिविल ब्रांच से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अजय खुद साइकिल पर चाय बेचकर 4 अन्य लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। इतना ही नहीं अब साइकिल पर चाय का आइडिया सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है लेकिन अजय के लिए यह सब कुछ इतना आसान नहीं था। बड़वानी जिले के एक गांव से साल 2016 में इंजीनियर बनने का सपना लेकर 2015 में इंदौर आए।

इंजीनियरिंग पूरी होने के बाद एमबीए की पढ़ाई भी की। इसी बीच उन्होंने 1 जनवरी 2022 को सायकिल वाली चाय की शुरुआत की। जब इंजीनियरिंग पूरी हुई उस वक्त कोरोना के कारण लॉकडाउन लगा। वे बताते हैं कि पिता गजानन खन्ना खेती करते थे, लेकिन उनकी किसानी भी सही से नहीं चल रही थी।

ऐसे में मैंने अपना कुछ शुरू करने के बारे में सोचा। सायकिल पर चाय बेचने का आइडिया आया। मैंने ये आइडिया अपने परिवार और दोस्तों को बताया। उनसे 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद ली। फिर एक साइकिल खरीदी। सायकिल के पीछे एक आर्टिस्ट से 'सायकिल वाली गाड़ी' लिखा हुआ कार्ट तैयार करवाया, जिसमें वे चाय रखकर बेच सकें। 1 जनवरी 2022 को अपना साइकिल से चाय बेचना शुरू किया। इतनी परेशानियों के बावजूद अजय ने अपनी मेहनत में कमी नहीं आने दी। साइकिल उठाकर व्यापार बढ़ाने के लिए निकल पड़े।

भंवरकुआं क्षेत्र के साथ ही नवलखा चौराहा, भोलाराम उस्ताद मार्ग, खंडवा रोड सहित आसपास की जगह पर साइकिल से जाकर चाय और अपना कार्ड देने की शुरुआत की। इसके लिए अजय 3 किमी दूर तक जाने लगे। धीरे-धीरे व्यापार में तेजी आने लगी। सुबह 8 से 11 बजे तक और शाम 4 से 11.30 बजे तक अजय साइकिल से करते। छोटा भाई चाय की दुकान संभालता। बीच के समय में वह अपनी एमबीए और कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी भी करते।

कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं अजय

अजय जहां अपनी 'सायकिल की गाड़ी' लगाते थे, वहां के मालिक ने कहा कि उन्हें दुकान किराए पर देना है। दुकान खुद ले लो या साइकिल हटाओ। अजय ने दोस्त से बात की जो पहले से जॉब करता था। उसकी मदद से वहीं 40 हजार रुपए महीने में दुकान ली। दुकान का रिनोवेशन कराया और सेटअप जमाया। मगर कुछ ही समय में दोस्त पीछे हट गया फिर टेंशन बढ़ गई। अजय ने यहां-वहां से पैसे जमा किए। इससे किराया भरा। अब अजय पर 6 से 7 लाख रुपए का कर्ज हो चुका था।