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दूध में फैट बढ़ाने के लिए मिलाते थे पानी और सोडियम सल्फेट

टैंकर और ड्रम से लिए गए दूध के सेंपल जांच में अमानक निकले

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Case of adulteration

इंदौर. सांची दूध में मिलावट मामले में भोपाल से आई जांच रिपोर्ट के बाद यह तो स्पष्ट हो गया कि डेयरी पर बिकने वाले सांची दूध में किसी तरह की मिलावट नहीं निकली, लेकिन घटना वाले दिन जिस सांची के टैंकर और आयशर के ड्रम से सेंपल लिए गए थे, वे जांच में अमानक निकले हैं।

दूध के टैंकर (एमपी०९-एचजी-८६३२) और आयशर (एमपी०९-जीएफ-३४०६) के ड्रम से लिए गए दूध के सेंपल जांच में अमानक निकले। वहीं मौके पर मौजूद सफेद पावडर (केमिकल) व पानी के सेंपल की जांच में भी मिलावट पाई गई। केमिकल में सोडियम सल्फेट मिला है। दूध के सेंपलों की जांच में एसएनएफ (सॉलिड नॉट फेट) की मात्रा कम पाई गई। पानी में सोडियम सल्फेट भी मिलाया।

इसलिए मिलाते थे
टैंकर संचालक का काम सोसायटियों से दूध इकट्ठा कर सांची प्लांट तक पहुंचाना था, लेकिन वह बीच में ही टैंकर में से दूध चुराकर उतना ही पानी मिला देता था। इधर, चोरी किए गए दूध को ड्रम में निकालकर उसमें पानी और सेडियम सल्फेट मिला देते थे। दूध में एसएनएफ की सामान्यत: मात्रा ८.५ होना चाहिए। वहीं मौके से लिए गए सेंपलों में टैंकर के दूध में इसकी मात्रा ८.१ व ड्रम के दूध में ७.१ मिली। टैंकर के दूध और सामान्यत: मानक दूध में ०.४ एसएनएफ का अंतर मिला है। चोरी किए दूध का फैट मानक स्तर तक ले जाने के लिए पानी और सोडियम सल्फेट (एसएनएफ) मिलाया जाता था।

यह हुआ था मौके पर
पुलिस ने दूध की जांच के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम को मौके पर बुलाया था। विभाग ने टैंकर में मौजूद दूध, ड्रम में रखे दूध, केमिकल और ड्रम में भरे पानी का सेंपल लिया था। बाजार में बिक रहे दूध की शुद्धता जांचने के लिए उसी दिन सपना-संगीता, संयोगितागंज, जीपीओ सहित एक अन्य डेरी से सांची दूध के सेंपल भी लिए थे।

यह है मामला
पुलिस ने १ नवंबर को देर रात मांगलिया के पास दो गोदामों के बीच सूने स्थान से टैंकर संचालक सुखविंदर सहित सात लोगों को रंगेहाथों गिरफ्तार किया था। इनके पास से एक टैंकर, दो अन्य गाडि़यां, केमिकल के ड्रम व दूध जब्त किया था। ये दूध के टैंकर में कुछ गड़बड़ी कर रहे थे। ये दुग्ध संघ की सोसायटियों से दूध लेकर सांची के प्लांट पर पहुंचाते थे। आरोपित सुखविंदर ने ठेका लेकर अपने ६ टैंकर इस काम में लगा रखे थे।